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खरीफ 2024 : फसल को नुकसान 80 फीसदी, सर्वे रिपोर्ट में दर्शा दिया 10 प्रतिशत

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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में भारी अनियमितता, जांच में सामने आई बीमा कंपनी की लापरवाही
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कई किसानों को नहीं मिला बीमा का लाभ, वास्तविक नुकसान के मुकाबले बेहद कम आंकी गई क्षति
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। खरीफ 2024 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कराए गए फसल सर्वे में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। किसानों का कहना है कि जहां उनकी फसलें 70 से 80 प्रतिशत तक नष्ट हुईं, वहीं बीमा कंपनी की सर्वे रिपोर्ट में केवल 10 प्रतिशत नुकसान ही दर्शाया गया। इसके चलते भारी क्षति के बावजूद अनेक किसानों को बीमा का लाभ नहीं मिल सका।
खरीफ वर्ष 2024-25 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत व्यक्तिगत क्लेम भुगतान में हुई गड़बड़ियों की जांच के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी ने 15 अप्रैल 2025 को आदेश दिए थे। इसके बाद सीडीओ की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय जांच समिति ने मामले की जांच की। जांच में सामने आया कि अधिकांश मामलों में फसलों को 70 से 80 प्रतिशत तक नुकसान हुआ था, जबकि बीमा कंपनी की ओर से तैयार सर्वे रिपोर्ट में नुकसान मात्र 10 से 20 प्रतिशत तक ही दर्ज किया गया।
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जांच के दौरान विकासखंड जखौरा के ग्राम जरौली निवासी गुलाबबाई अहिरवार ने बताया कि उन्होंने खरीफ 2024 में उड़द की फसल का बीमा कराया था, जो बारिश के कारण जलभराव में नष्ट हो गई थी। मौके पर पहुंचे बीमा कंपनी के कर्मियों ने नुकसान लगभग 80 प्रतिशत पाया था, लेकिन सर्वे फार्म में केवल 10 प्रतिशत क्षति दर्शाई गई।
इसी तरह विकासखंड बार के ग्राम चंदावली निवासी विनोद ने बताया कि टोल फ्री नंबर पर 80 प्रतिशत फसल क्षति की शिकायत दर्ज कराने के बाद सर्वे किया गया लेकिन रिपोर्ट में केवल 10 प्रतिशत नुकसान दिखाया गया। मड़ावरा विकासखंड के ग्राम बरौदिया निवासी जगत सिंह ने कहा कि उनकी उड़द की फसल 70 से 80 प्रतिशत तक नष्ट हुई, लेकिन मौके पर कोई जांच नहीं की गई। बाद में कृषि विभाग द्वारा दिखाए गए सर्वे फार्म में 10 प्रतिशत नुकसान दर्ज था।
ग्राम उदयपुरा निवासी सोहनलाल, जमौरा निवासी गंगाराम, दैलवारा निवासी मदनगोपाल, बार विकासखंड के ग्राम भैलोनी सूबा निवासी बृजभान, महरौनी के ग्राम अमौरा निवासी बबलू, ग्राम चौकी निवासी दिनेश कुमार, ग्राम सिलावन निवासी चंद्रभान, जखौरा के ग्राम निवाहो निवासी सोन सिंह यादव, बिरधा के ग्राम मैनवार निवासी नत्थू सिंह तथा ग्राम थनवारा निवासी ममता सहित कई किसानों ने जांच टीम को बयान देकर बताया कि उनकी फसलें 70 से 80 प्रतिशत तक नष्ट हुई थीं, जबकि सर्वे रिपोर्ट में केवल 10 प्रतिशत क्षति दर्शाई गई।
इसके अलावा, मड़ावरा के ग्राम बुंदनी निवासी गुनसागर और तालबेहट विकासखंड के ग्राम बिगारी निवासी करन सिंह की फसलों को भी लगभग 80 प्रतिशत नुकसान हुआ था, लेकिन सर्वे रिपोर्ट में मात्र 20 प्रतिशत क्षति दर्ज की गई। जखौरा के ग्राम सिलगन निवासी किसान सुखलाल ने बताया कि उन्हें 60 से 70 प्रतिशत नुकसान हुआ, जबकि सर्वे फार्म में 15 प्रतिशत ही दर्ज किया गया।
तालबेहट के ग्राम पवा निवासी मलीदा ने आरोप लगाया कि उनकी फसल 90 प्रतिशत तक नष्ट हो गई थी, लेकिन बीमा कंपनी का कोई कर्मचारी सर्वे के लिए नहीं आया और न ही उनसे किसी प्रकार के हस्ताक्षर कराए गए। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने 20 प्रतिशत क्षति की रिपोर्ट लगाई, जो पूरी तरह गलत है।

इस प्रकार मिलता है व्यक्तिगत क्लेम में फसल बीमा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में व्यक्तिगत क्लेम के लिए फसल नुकसान (जैसे ओलावृष्टि, चक्रवात, बेमौसम बारिश से नुकसान) होने पर 14 दिनों के भीतर किसान को बीमा कंपनी को सूचित करना होता है। इसके बाद सर्वे और नुकसान का आकलन किया जाता है और फिर नुकसान के प्रतिशत के आधार पर बीमा राशि का भुगतान किया जाता है। वहीं, योजना में मध्यावधि बीमा अचानक प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों जैसे सूखा, अतिवृष्टि या लंबे समय तक सूखे के कारण फसल को होने वाले नुकसान पर दिया जाता है। फसल के बीच में ही उत्पादन में बड़ी गिरावट यानी 50 फीसदी से अधिक के नुकसान का अनुमान लगने पर किसानों को संभावित बीमा राशि का 25 फीसदी तक अग्रिम भुगतान किया जाता है।
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वर्जन

व्यक्तिगत क्लेम में किसान व्यक्तिगत रूप से फसल नुकसान का दावा करता है और सर्वे में जितना नुकसान पाया जाता है, बीमा कंपनी उसी आधार पर बीमा राशि देती है। खरीफ-2024 में फसल बीमा के मामले में दोबारा जांच चल रही है। - राजीव कुमार भारती, जिला कृषि अधिकारी
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