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फर्जी चिकित्सक मामला : अब मुंबई जाकर अभिलेखों की जांच करेगी एसआईटी

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कस्टम विभाग की नौकरी से जुड़े दस्तावेज खंगाले जाएंगे, 1999 के करप्शन केस के साक्ष्य भी जुटाए जाएंगे
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अमेरिका में रह रहे बहनोई की पहचान पर तीन साल तक करता रहा नौकरी, जांच में सामने आ रही हैं नई परतें
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बहनोई डॉ. राजीव गुप्ता की चिकित्सकीय डिग्री और पहचान का इस्तेमाल कर मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजिस्ट की नौकरी करने वाले अभिनव सिंह मामले की जांच एसआईटी ने तेज कर दी है। अब पुलिस की विशेष टीम ( एसआईटी ) मुंबई जाकर वर्ष 1999 तक कस्टम विभाग में अभिनव सिंह की नौकरी से जुड़े अभिलेखों की जांच करेगी। इसके साथ ही वहां दर्ज करप्शन के मामले में भी साक्ष्य संकलित किए जाएंगे।
अमेरिका में रह रहे बहनोई की पहचान और चिकित्सकीय डिग्री के आधार पर तीन वर्ष तक मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में कार्य करने के आरोप में गिरफ्तार अभिनव सिंह के खिलाफ पुलिस गहन जांच में जुटी है। एसआईटी अब तक कोलकाता, मथुरा, रुड़की, फर्रुखाबाद और अलीगढ़ जाकर उसके शैक्षिक अभिलेख एकत्र कर चुकी है।
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पुलिस ने आरोपी द्वारा डॉ. राजीव गुप्ता के नाम से बनवाए गए आधार कार्ड, पैन कार्ड, शस्त्र लाइसेंस, बैंक पासबुक, पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस समेत अन्य कूटरचित दस्तावेज भी जब्त किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। अब सीओ सदर अजय कुमार के नेतृत्व में गठित एसआईटी टीम मुंबई जाएगी, जहां कस्टम विभाग में नौकरी के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों की पड़ताल के साथ वर्ष 1999 में दर्ज करप्शन के मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाए जाएंगे।
पुलिस की जांच में तेजी को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि जिला कारागार में निरुद्ध अभिनव सिंह की मुश्किलें आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं। एसपी मोहम्मद मुश्ताक ने बताया कि एसआईटी मामले की गहनता से जांच कर रही है और आरोपी द्वारा तैयार किए गए कूटरचित दस्तावेजों को एक-एक कर संकलित किया जा रहा है।
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सीबीआई से बचने के लिए 20 साल तक फरारी काटता रहा आरोपी
अभिनव सिंह ने आईआईटी रुड़की से बीई (कंप्यूटर साइंस) की पढ़ाई की थी। तीन वर्ष की तैयारी के बाद उसका चयन कस्टम अधिकारी के रूप में हुआ। वर्ष 1999 में मुंबई में उसके खिलाफ करप्शन का मामला दर्ज होने पर वह फरार हो गया। सीबीआई से बचने के लिए उसने करीब 20 वर्षों तक पहचान छिपाकर अलग-अलग स्थानों पर जीवन बिताया। इसी दौरान उसने अमेरिका में रह रहे अपने बहनोई डॉ. राजीव गुप्ता की पहचान का दुरुपयोग करते हुए आधार कार्ड, पैन कार्ड और चिकित्सकीय डिग्री सहित अन्य दस्तावेज कूटरचित रूप से तैयार करवा लिए।
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जेल से रिहा होने के बाद 2022 में संविदा पर किया था आवेदन
वर्ष 2019 में सीबीआई ने अभिनव सिंह को मथुरा के एक मेडिकल कॉलेज से नौकरी करते हुए गिरफ्तार कर मुंबई जेल भेजा था। करीब 16 माह जेल में रहने के बाद जुलाई 2020 में वह रिहा हुआ। इसके बाद वर्ष 2022 में उसने डॉ. राजीव गुप्ता के नाम से संविदा पर हृदय रोग विशेषज्ञ पद के लिए आवेदन किया। चयन होने के बाद वह मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में कार्य करते हुए मरीजों का इलाज करता रहा।
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