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चोर ने कहा हम भी नई सरकार बनाएंगे....

Thu, 04 Oct 2018 01:21 AM IST
lalitpur
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administration - फोटो : amar ujala
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ललितपुर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की जयंती पर कौमी एकता की प्रतीक साहित्यिक संस्था हिंदी, उर्दू, अदबी संगम के बैनर तले एक विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने अपनी पंक्तियों के माध्यम से लोगों में जोश भर दिया। अधिवक्ता और कवि रामकृष्ण कुशवाहा ने कहा कि मजहब जुदा सही वतन तो इक है यारो, धरती मां और अपना गगन तो इक है यारो। कौमी एकता के रंगों से महक रहा गुलशन सारा, हर मजहब के फूल खिले चमन तो इक है यारो। रामस्वरूप नामदेव अनुरागी ने अपनी पंक्तियों के माध्यम से कहा कि हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में हैं भाई, मुहब्बतका पाठ पढ़ाकर मानवता सिखलाई। पूनमरानी ने शेर पढ़ते हुए कहा कि रेगिस्तान भी हरे हो जाते हैं तब, अपनों के साथ अपने खड़े हो जाते हैं जब। राजाराम खटीक ने कहा कि सरहद पे जो जान लुुटाते हैं, वो मर कर अमर हो जाते हैँ। किशन सिंह बंजारा ने अपनी पंक्ति पढ़ी कि चोर ने कहा हम भी नई सरकार बनाएंगे, देश से बेकारी को दूर भगाएंगे। एमआर खान सोज ने कहा कि वो गोरे गरेबा में सताने आए। अशोक क्रांतिकारी ने कहा कि ये देश समझ रहा गांधी शास्त्री की लाचारी आज तक। सुमनलता शर्मा चांदनी ने कहा कि एक लंगोटी इकसोटी ने अदभुत किया कमाल, चुटकी में अंग्रेजों को भारत से दियसा निकाल। काका ललितपुर ने कहा कि ये महान दो हस्तियां खिले चमन में फूल, किए काम निज देश हित, रहे दिलों में झूल। शिखर चंद मुफलिस ने कहा कि चला एकता भी जबरदस्त आंधी, मरा देश के हित में बेमौत गांधी। एमएल भटनागर ने कहा कि शतवार नमन ये मेरा है वापू तेरे चरणों में, जो सौंप गए थे हमको तुम, सोचा नहीं था सपनों में। इस मौके पर गेंदालाल सतभैया, श्यामलाल श्याम, केके पाठक ने भी अपनी रचनाएं पेश कीं। इस मौके पर विनोद, जितेंद्र, राजू आचार्य, मंगल, सुमित मिश्रा, हरगोविंद अहिरवार, मनीष कुशवाहा, नंदलाल पहलवान आदि उपस्थित रहे।  
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-वहीं गांधी जयंती के अवसर पर गुलिस्तान ए अदब संस्था द्वारा सदनशाह के पास मुशायरा का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि सिने स्टार राजा बुंदेला औश्र विशिष्ट अतिथि बिहारी लाल बबेले रहे। मुशायरा में शायरा सोनिया शबनम ने कहा कि जलजले क्यों न आयें जमीं पर सुनो, खुद में इंसान ही अब खुदा हो गया। सत्तार नदमी ने पढ़ा कि इक आग वो नफरत की लगाने में लगे हैं। अफसर मनचला ने कहा कि वो साजिशों के फूल खिलाने में रह गया, और मैं वतन का कर्ज चुकाने में रह गया। जहीर ललितपुरी ने कहा कि जब से तलवार की ताकत में कमी आई है, ऐसे हालात में लड़ने को कलम रखना पड़ा। गीता सागर ने कहा कि बेच दे जो दीन और ईमान भी आदमी का कोई अब भरोसा नहीं। असर ललितपुरी ने कहा कि हाकिम से लेके आज के छोटे गुलाम तक, सब रफ्ता आ गए जिज के हराम तक। शायर शकील झांसी ने कहा कि हक बयानी से डर गए जो शकील, उनके हाथों में फिर कलम क्यों है। इस मौके पर रवींद्र पाठक, भगवान सिंह यादव, राजाराम यादव, फूला देवी कुशवाहा, शैलेंद्र कुमार, आशीष खरे, विक्रम सिंह, प्रसून धाकड़, सुमन चौधरी, सलमान खान, कृष्णपाल राजपूत, आशू, नईम, वसीम असर आदि उपस्थित रहे।
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