ललितपुर। कार्तिक मास का स्नान कर रही महिलाओं ने शुक्रवार को गांव घेरते हुए आंवला के पेड़ की पूजा की। ऐसी मान्यता है कि इच्छा नवमी को भगवान कृष्ण कहीं चले जाते हैं, जिन्हें कार्तिक स्नान करने वाली महिलाएं खोजती हैं।
कार्तिक मास में स्नान करने वाली महिलाएं भगवान श्री कृष्ण की पूजा- अर्चना करती है। नवमी के दिन भगवान कृष्ण अचानक गायब हो जाते हैं, जिस कारण महिलाएं गांव व मुहल्ले में उनकी तलाश में निकल पड़ती है।
शुक्रवार को सुबह से ही महिलाएं गाजे बाजे के साथ समूह में निकली। गली मुहल्लों में घूमते हुए दोपहर में उन्होंने आंवला के पेड़ के नीचे पूजा- अर्चना की और भोजन किया।
तुवन मंदिर में महिलाओं ने आंवला के पेड़ की पूजा की तो कंपनी बाग में कदंब के पेड़ की पूजा करने बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंची। उधर, केपीएस डिग्री कालेज महेशपुरा में आंवला नवीं के महत्व पर प्रकाश डाला गया। प्रबंधक डा. सतीश सुड़ेले व प्राचार्य डा. कपिल नाथ श्रंगीऋषि ने कहा कि आंवला नवीं का त्योहार भारतीय संस्कृति का त्योहार है। परंपरा के अनुसार के इस दिन आंवला की पूजा की जाती है।
इससे पर्यावरण को सुरक्षित करने में मदद मिलती है। इस मौके पर डा. जनक किशोरी शर्मा, डा. जितेंद्र राजपूत, अनुराग चतुर्वेदी, डा. रजनी चौबे, अरुणा सिंह, प्रीति शुक्ला, छाया तिवारी, हेमलता साहू, नेहा खरे, अखिलेश कुमार व डिप्टी वन रेंजर प्रागीलाल भी उपस्थित थे।