सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने बताया थानाध्यक्ष जखौरा शशिकांत दीक्षित ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि वह 30 नवंबर 2014 की शाम थनवारा नहर के पास गश्त कर रहे थे, वहां स्वॉट टीम प्रभारी शशांक राजपूत अपनी टीम के साथ मौजूद थे। हम यहां आपस में बात कर रहे थे कि तभी मुखबिर ने बताया कि बालमुकुंद शराब बनाने का उपकरण, ओपी स्प्रिट लेकर अपने खेत पर पहुंचने वाला है। नकली शराब बनाकर बेचता है।
टीम ने मौके पर पहुंचकर उक्त व्यक्ति को घेरकर पकड़ लिया और पूछताछ की, जिसमें उसने अपने को ग्राम थनवारा निवासी बताया। मौके से पांच लीटर स्प्रिट, 78 खाली क्वार्टर, जिन पर झूम ब्रांड देशी शराब का लेबल लगा था। पॉलीथिन में ढक्कन के अंदर लगने वाली सील 233 व 109 ढक्कन, उत्तर प्रदेश आबकारी के होलोग्राम थे। जिन्हें खेत मेें गाढ़कर रखा गया था। यहां से दस-दस लीटर डिनेचर्ड स्प्रिट भी बरामद ,िकया गया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था और आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। बृहस्पतिवार को अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम की अदालत ने अभियुक्त बालमुकुंद को मिलावटी शराब बनाने और धोखाधड़ी के अपराध में दोषी पाते हुए दस वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही पंद्रह हजार रुपए अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर 16 माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।