38 साल बाद मिला न्याय, सराफा कारोबारी को सजा
ललितपुर। अपर सत्र न्यायाधीश उमेश कुमार सिरोही की अदालत ने 38 साल पुराने मामले में तीन अभियुक्तों को अमानत में खयानत का दोषी पाते हुए दो-दो वर्ष का साधारण कारावास एवं दो-दो लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अपर शासकीय अधिवक्ता खुशीलाल लोधी ने बताया कि 23 अगस्त 1981 को मोहल्ला कटरा बाजार निवासी मानिक चंद ने अपने पड़ोसी मक्खन सिंघई के विरुद्ध थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसमें बताया था कि 19 अगस्त 1981 को दिन में करीब साढ़े नौ बजे मानिक चंद अपने कटरा बाजार स्थित मकान पर था और उस समय वह स्नान कर रहा था कि उसी दौरान तत्कालीन एडीएम डीपी सिंह ने मय पुलिस बल के उसके घर के भीतर प्रवेश किया। आवाज सुनकर वह नीचे आया और एडीएम के निर्देश पर साहूकारी के कागजात चेक कराने लगा। उसकी पत्नी सोना देवी ऊपर थी। उसने सड़क के बच्चों की आवाज सुनी कि बंदूक वाले घुस आए हैं। इससे पत्नी घबरा गई और समझा कि घर में डकैती पड़ रही है।
पत्नी घबराकर पीतल के डिब्बा में अपने, बहुओं, रिश्तेदारों एवं अमानत में रखे हुए जेवरात लेकर रसोई घर में छिपाने गई, तभी उसके मकान के दक्षिण में स्थित रोशनदान से पड़ोसी मक्खन सिंघई की पत्नी अंगूरी देवी ने आवाज देकर बुलाया और कहा कि जो जेवरात आदि सुरक्षित रखना हो वह उसके पति मक्खन को दे दो। वहीं पर मक्खन भी खड़े थे। उसकी पत्नी ने विश्वास में आकर सोने के जेवरात से भरा डिब्बा कपड़े से बांधकर मक्खन को सौंप दिया।
इसी दौरान मानिकचंद के दोनों पुत्र राजेंद्र कुमार एवं सुमत चंद अपनी-अपनी दुकान से घर पर आए, तब चेकिंग चल रही थी। जिससे वह ऊपर मां के पास चले गए। वहां मक्खन को जेवरात देने का पता चला, तो बेटों ने मां से कहा कि कोई खास घबराने की बात नहीं है और वह जेवर वापस ले आते हैं। उसकी पत्नी ने पड़ोसी अंगूरी व मक्खन को आवाज लगाई तो मक्खन की पुत्री ने बताया कि दोनों अस्पताल गए हैं। इसके बाद उसके दोनों पुत्र जेवरात का डिब्बा लेने मक्खन के घर गए तो अंगूरी ने बताया कि मक्खन जेवरात का डिब्बा लेकर सुरक्षित रखने राजकुमार नायक के घर गए हैं। आने पर मंगवा देेंगे। दोनों पुत्र राजकुमार के घर गए तो वहां बताया गया कि मक्खन आए थे, राजकुमार को लेकर कहीं चले गए हैं। उसके पुत्र फिर राजकुमार व मक्खन को तलाशते रहे और रात आठ बजे घर लौट आए, लेकिन वह नहीं मिले।
मक्खन के घर पर उनके भाई धन्नालाल, कमली व अभय से संपर्क कर बातचीत की। इसके बाद दोनों पुत्र बबीना, झांसी, ग्वालियर, आगरा व सागर भी गए, लेकिन कोई सुराग नहीं लग सका। इसके बाद उन्होंने उक्त जेवरातों की सूची तैयार करके 23 अगस्त 1981 को कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने मक्खन लाल, कमली उर्फ कमल, कस्तूरी देवी व अभय कुमार के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया, इसके बाद निचली अदालत ने वर्ष 2010 में अपना निर्णय देते हुए अभियुक्त मक्खन को धारा 406 एवं अभय कुमार एवं कस्तूरी को धारा 411 के अपराध में दोष सिद्ध पाते हुए दो-दो वर्ष का सश्रम कारावास व तीन-तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुुनाई थी।
अभियुक्तों द्वारा अपर न्यायालय में अपील दायर की गई, इस पर अपर सत्र न्यायाधीश ने बृहस्पतिवार दोनों पक्षों की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के निर्णय में संशोधन करते हुए अभियुक्त मक्खन को धारा 406, अभय कुमार एवं कस्तूरी देवी को धारा 411 के अपराध में दोषी पाते हुए दो-दो वर्ष का साधारण कारावास एवं प्रत्येक को दो-दो लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अर्थदंड की धनराशि वसूल होने पर अस्सी प्रतिशत धनराशि वादी पक्ष को बतौर क्षतिपूर्ति दिलाने के आदेश भी दिए। इसमें से अभियुक्त कमली उर्फ कमल कुमार की मौत हो गई।
फेरी लगाकर साड़ी बेचता था
अदालत में दी गई दलीलों में बताया गया कि मक्खन पहले फेरी लगाकर साड़ी बेचता था, लेकिन बाद में उसकी माली हालत सुधर गई और वह सराफा का कारोबार करने लगा।