ललितपुर। अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) ने दहेज के लिए पत्नी की हत्या के मामले में लघु सिंचाई विभाग के एक अवर अभियंता को दोषी पाया है। अब इस मामले में न्यायालय 31 अक्तूबर को अपना फैसला सुनाएगा।
जिला हमीरपुर के कस्बा राठ निवासी नवल किशोर नगाइच ने कोतवाली पुलिस को तहरीर दी थी कि उसकी भतीजी सरिता की शादी 19 अप्रैल 1995 को महेंद्र कुमार पुत्र छोटेलाल दुबे, निवासी कस्बा महोबा के साथ हुई थी। उन्होंने बताया कि महेंद्र कुमार ललितपुर में लघु सिंचाई विभाग में कार्यरत है और कृष्णा टाकीज के पास चड्ढा वकील के मकान में अपनी पत्नी सरिता के साथ किराए से रहते थे। शादी के बाद से ही भतीजी का पति महेंद्र दुबे और देवर पप्पू दहेज के लिए उसकी भतीजी को परेशान करते रहते थे। भतीजी को धमकी दी थी कि पचास हजार रुपये नहीं दिए तो उसकी जान की खैर नहीं। वह अस्थाई नौकरी को पक्का कराने के बहाने रुपये मांग रहे थे। 19 अक्तूबर 1995 को उन्होंने कमरा बंद करके सरिता को जलाकर मार डाला। पचास हजार रुपये मांगने की बात सरिता ने करवा चौथ वाले दिन अपने पिता को तब बताई थी जब वह करवा चौथ का सामान देने ललितपुर आए थे। सरिता ने अपने भाई से भी मरने के कुछ दिन पूर्व यह बात बताई थी।
सरिता की मौत की खबर मिलने पर ललितपुर आने से पूर्व ही वह लोग सरिता का शव अस्पताल ले जा चुके थे। इस पर कोतवाली पुलिस ने आरोपी पति महेंद्र दुबे, देवर पप्पू और ससुर छोटेलाल के खिलाफ दहेज की मांग करने, दहेज की खातिर हत्या करने और दहेज अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
इस मामले में पुलिस ने विवेचना में दो आरोपियों ससुर छोटेलाल दुबे और देवर पप्पूू के नाम मुकदमे से बाहर कर दिए थे और मुख्य आरोपी पति महेंद्र दुबे के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। बुधवार को न्यायालय ने महेंद्र दुबे पर दहेज की खातिर पत्नी की हत्या के मामले में दोष सिद्ध पाया है और सजा के बिंदुओं पर सुनवाई के लिए 31 अक्तूबर की तारीख तय कर दी है। मामले की पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह यादव ने की।