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Lalitpur News: आठ साल तक जिले में सक्रिय रही जेकेवी लैंड एंड डेवलपर्स कंपनी

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आठ साल तक जिले में सक्रिय रही जेकेवी लैंड एंड डेवलपर्स कंपनी
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11 जिलों में दर्ज हैं 19 मुकदमे, असिस्टेंट डायरेक्टर प्रियंका सिंह पर था 50 हजार का इनाम
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जेकेवी लैंड एंड डेवलपर्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ग्रुप ऑफ कंपनी जिले में आठ वर्ष तक सक्रिय रही। कंपनी ने लोगों को कम समय में दोगुना मुनाफा देने का लालच देकर करोड़ों रुपये का निवेश कराया और उसके बाद अचानक लापता हो गई। कंपनी की असिस्टेंट डायरेक्टर प्रियंका सिंह, जो वर्ष 2019 से वांछित चल रही थीं, को एसटीएफ ने बुधवार की सुबह गिरफ्तार कर लिया। उनकी गिरफ्तारी पर पुलिस ने अगस्त 2025 में 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।


2011 में खुला था ऑफिस, 2019 में हुई थी धोखाधड़ी की शिकायत

वर्ष 2011 में शहर के इलाइट चौराहा स्थित एक इमारत में कंपनी का कार्यालय खोला गया था। डायरेक्टर दीपक शुक्ला, आशीष श्रीवास्तव, असिस्टेंट डायरेक्टर प्रियंका सिंह, और अतिरिक्त निदेशक राजेश कुमार सिंह, दुर्गेश जायसवाल, विक्रांत त्रिपाठी इसके पदाधिकारी थे।
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कंपनी ने कई लोगों को नौकरी पर रखा और एजेंटों के माध्यम से निवेश योजनाएँ शुरू कीं। लोगों से एफडी खुलवाईं, प्रमाणपत्र दिए और अधिक मुनाफे का झांसा देकर करोड़ों रुपये जमा कराए। जब राशि करोड़ों में पहुँच गई, तो कंपनी दफ्तर बंद कर जिले से गायब हो गई।



धोखाधड़ी का मामला दर्ज, कई बार नोटिस जारी

धोखाधड़ी की जानकारी मिलते ही पीड़ितों ने पुलिस से शिकायत की। 31 मई 2019 को न्यायालय के आदेश पर महेश पुत्र कनन निवासी ग्राम झरकौन की तहरीर पर मामला दर्ज किया गया। आरोपियों पर कोतवाली पुलिस ने जांच शुरू की, परंतु कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी।

कोर्ट से नोटिस जारी होने के बावजूद आरोपी पेश नहीं हुए, जिसके बाद 12 सितंबर 2023 को कोर्ट आदेश की अवमानना का मुकदमा भी दर्ज हुआ। 1 अगस्त 2024 को पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया। इसी क्रम में 26 जून को डायरेक्टर आशीष श्रीवास्तव को इंदौर से गिरफ्तार किया गया, जबकि प्रियंका सिंह फरार रहीं।



संयुक्त रूप से दिया गया था कोर्ट में प्रार्थना पत्र

पीड़ितों — महेश कुमार, आशाराम, हुकुमचंद्र, बालमुकुंद, हजारीलाल, रविकांत सोनी, बृजकिशोर, सुरेश कुमार, शिवचर आदि ने संयुक्त रूप से न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की थी। ये सभी कंपनी में एजेंट के रूप में कार्यरत थे और अपने साथ ही अन्य निवेशकों के साथ हुई धोखाधड़ी को लेकर न्याय की मांग कर रहे थे।
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पहले लौटाए थे पैसे, फिर जमा कराया करोड़ों
कंपनी ने शुरुआत में लोगों का विश्वास जीतने के लिए एफडी की अवधि पूरी होने पर निवेशकों को पैसे लौटाए। इससे एजेंटों और ग्राहकों का भरोसा बढ़ा और अधिक लोग कंपनी में निवेश करने लगे। लेकिन जब निवेश की राशि करोड़ों में पहुंची, तो कंपनी अचानक कार्यालय बंद कर भाग गई।
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