संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना ड्रिप फेज-2 के तहत जामनी बांध के जीर्णोद्धार के लिए सिंचाई विभाग ने इस वित्तीय वर्ष में 10.61 करोड़ रुपये की मांग शासन से की है। उक्त धनराशि से बांध के गेटों का आधुनिकीकरण, सीपेज, लीकेज, पिचिंग सहित अन्य कार्य कराए जाएंगे।
यहां सबसे ज्यादा बांध होने के बाद भी पेयजल एवं सिंचाई की समस्या रहती है। कुछ बांध तो पचास साल पुराने हैं, इनमें से जामनी बांध एक है। इसका निर्माण 1973 में हुआ था। बांध में कई कमियां उभर आई हैं। सबसे बड़ी समस्या लीकेज-सीपेज की है। इस बांध से किसानों को कुल भंडारण क्षमता 92.87 एमसीएम के मुकाबले 67 एमसीएम पानी सिंचाई के लिए उपलब्ध कराया जाता है। बांध पुराना हो जाने के कारण इसको बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना ड्रिप योजना के फेज-2 में चयनित किया गया था।
जामनी बांध की कार्ययोजना शासन को भेजी गई थी, जिसके बाद 17.91 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति मिली थी। लेकिन, निविदा प्रक्रिया शासन की मंशानुरूप न होने के चलते बांध का आधुनिकीकरण नहीं हो पा रहा था। वित्तीय वर्ष 2024-25 में काम कराने के लिए सिंचाई विभाग ने शासन से 10.61 करोड़ रुपये की मांग की है। कार्यदायी संस्था नामित होने के बाद बांध का जीर्णोद्धार शुरू होगा। सहायक अभियंता सिंचाई खंड़ इं. सलमान खान ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में 10.61 करोड़ रुपये की मांग शासन से की गई है। पहले चरण का काम शुरू हो जाने के बाद शेष बची धनराशि की मांग की जाएगी।
ये होने हैं काम: गेटों का आधुनिकीकरण, अपस्ट्रीम में पिचिंग, गेटों के पास सोलर लाइट, डाउन स्ट्रीम का सुदृढ़ीकरण, पैराविट की रिपेयरिंग, निरीक्षण भवन की मरम्मत, बांध से निकली नहर के हेड पर लगे दोनों गेट पर प्रोटेक्शन शेड, टाइप वन स्तर के दो आवास का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है।
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80 से अधिक गांवों में होती है जलापूर्ति
ब्लॉक मड़ावरा क्षेत्र में जामनी नदी पर निर्मित जामनी बांध का पूर्ण जलस्तर 403.55 मीटर और न्यूनतम जलस्तर 396.19 मीटर है। इससे निकली नहरों के जरिये दो दर्जन गांवों की करीब 11 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होती है। इसके साथ 80 से अधिक गांवों में जलापूर्ति की जाती है। यूपी-एमपी के बीच हुए एक समझौते के तहत इस बांध से मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ को भी पेयजल के लिए पानी दिया जाता है।