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‘जामनी’ का सीना चीर रहे खनन माफिया

Fri, 28 Oct 2016 12:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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balu kann, lalitpur news - फोटो : amar ujala, lalitpur news
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सिलावन(ललितपुर)। काले कारोबारी धड़ल्ले से जामनी नदी से बालू का खनन कर रहे हैं। उन्हें न कोर्ट के आदेश की परवाह, न पर्यावरण से सरोकार और न ही प्रशासनिक कार्रवाई का डर है। यह लोग नदी के आसपास किसानों के खेतों को ट्रैक्टर-ट्रालियों से रौंद रहे हैं। खेतों में कटान से उपज में लगातार गिरावट आ रही है। वहीं, नदी की नैसर्गिक सुंदरता को भी आघात पहुंच रहा है। वन विभाग, पुलिस और विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी है, लेकिन वे आंखें मूंदे हैं। परेशान किसानों ने उच्चाधिकारियों से खनन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। 
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वन प्रभाग क्षेत्र छपरट से सट कर निकली जामनी नदी में इन दिनों बालू का अवैध खनन बेखौफ जारी है। नदी से हर रोज अवैध तरीके से बालू खनन कर दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रालियों के जरिए इधर से उधर की जा रही है। खनन माफिया जामनी नदी के धरारा, बंदरा घाट, नीम घाट, कुजान घाट, चौकी घाट, मिदरवाहा घाट सहित अन्य घाटों से बालू का अवैध खनन कर रहे हैं। बालू से भरी ट्रैक्टर ट्रालियां किसानों के खेतों में से होकर निकाली जाती हैं। इससे उनके खेत खराब हो रहे हैं। कटान भी हो रहा है जिससे उपज क्षमता में लगातार गिरावट आ रही है। 
किसरदा गांव निवासी किसान सूरत सिंह बताते हैं कि धरारा घाट का रास्ता उनके खेतों से होकर जाता है। इस घाट पर बालू काफी अधिक मात्रा में एकत्रित होती है, जिसे खनन माफिया अवैध ढंग से ट्रैक्टर ट्रालियों में भरकर ले जाते हैं। इससे उनके खेतों में मिट्टी का कटान हो रहा है। इसका दुष्प्रभाव फसल पैदावार में आ रहा है। उन्होंने तहसील दिवस से लेकर विभागीय अधिकारियों से भी कई बार शिकायत की है, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। अब तो मना करने पर वह लोग गाली-गलौज और मारपीट पर आमादा हो जाते हैं। किसरदा गांव में इस समस्या से पीड़ित वे अकेले किसान नहीं हैं, बल्कि नदी तट से लगे सभी किसानों को खनन माफियाओं की ज्यादतियों का सामना करना पड़ रहा हैं। 
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वहीं, नदियों से अवैध खनन से दोहरी मार पड़ रही है। एक तो पर्यावरण को खतरा पैदा हो रहा है तो दूसरी ओर करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि उठानी पड़ रही है। ऐसा नहीं है कि अवैध खनन की जानकारी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को न हो, लेकिन वह कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। किसानों ने उच्चाधिकारियों से माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की मांग की है।   

एनजीटी के आदेश की उड़ाई जा रही धज्जियां 
बालू के अवैध खनन से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है। जानकार बताते हैं कि नदी के पानी को बालू पकड़े रखती है। बालू उठा लेने से जहां बाढ़ की संभावनाएं बढ़ जाती हैं, वहीं अंधाधुंध बालू खनन से नदी के किनारे भारी कटान होता है। इससे जैव विविधता नष्ट होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने वर्ष 2012 में नदियों से बालू के खनन पर रोक लगा रखी है, बावजूद इसके महरौनी स्थित जामनी और सजनाम नदी से बेखौफ हो बालू का अवैध खनन कर एनजीटी के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। 

विभागीय कर्मियों की जुगलबंदी से चल रहा अवैध खनन का खेल
सूत्रों के अनुसार अवैध खनन विभागीय कर्मियों और खनन माफियाओं की जुगलबंदी से चल रहा है। जब भी कोई विभागीय अधिकारी खनन स्थल पर छापामार कार्रवाई की योजना बनाता है तो कुछ कर्मचारी इसकी जानकारी तुरंत खनन माफियाओं को दे देते हैं। इससे माफिया मौके से वाहन आदि लेकर रफूचक्कर हो जाते हैं और अधिकारी को वहां से खाली हाथ लौटना पड़ता है। 
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अवैध खनन के खिलाफ लगातार कार्रवाई करने के निर्देश खान विभाग को जारी किए गए हैं। जामनी नदी में अवैध खनन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. रूपेश कुमार, जिलाधिकारी 
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