ललितपुर। आर्यिका पूर्णमति माताजी ने समय को बलवान बताया। उन्होंने कहा कि समय के रंग हजार होते हैं, वह कभी बने को उजाड़ देता तो कभी बिगड़े को बना देता है। संसार में यह सिलसिला चलता रहता है, इसलिए समय को नहीं टालना चाहिए।
श्री क्षेत्रपाल मंदिर में अहर्चक्र महामंडल विधान में चौबीस तीर्थंकरों का पूजन-अर्चन संगीतमय भक्तिनृत्य के साथ हुआ, जिसमें मुकुटबद्ध इंद्र व इंद्राणियों ने भक्ति में विभोर होकर प्रभु के चरणों में भावना की भक्ति है। आर्यिकाश्री ने जीवन में संस्कारों को उपयोगी बताया। उन्होंने प्रभु की महिमा का गुणानुवाद करते हुए कहा कि मन को सांसारिक मोह से हटाकर निष्काम भक्ति में लगाना चाहिए, तभी भक्ति आनंदकारी होती है।
प्रात:काल अभिषेक व शांतिधारा के उपरांत विधान में भगवान अभिनंदन नाथ, प्रभु सुमतिनाथ, पदमप्रभ भगवान, सुपार्श्वनाथ भगवान, अष्टम तीर्थंकर चंद्रप्रभ प्रभु, सुविधिनाथ भगवान, शीतलनाथ भगवान, श्रयांसनाथ, वांसपूज्य और अनंतनाथ जिनराज का भक्तिपूर्वक पूजन किया गया। प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप जैन सुयश ने अहर्चक्र विधान को पुण्यकारी बताया।
सायंकाल सुरेश चंद और आकाश जैन के आवास से महाआरती प्रारंभ हुई, जिसमें महिलाएं मंगल गान करते हुए गाजेबाजे के साथ आयोजन स्थल श्री क्षेत्रपाल मंदिर पहुंची, जहां चौबीसी समोवशरण में विराजित श्रीजी की आरती हुई। इसमें प्रमुख रूप से जैन पंचायत अध्यक्ष अनिल जैन अंचल, डा. अक्षय टड़ैया, प्रदीप जैन सतरवांस, राजेंद्र जैन थनवारा, मोदी पंकज जैन पार्षद, मुकेश सराफ, संजीव जैन, संजय मोदी, शीलचंद अनौरा, कोमल दादा, अखिलेश जैन गदयाना, नरेंद्र जैन छोटे पहलवान मौजूद रहे।