ललितपुर। जिला कारागार अधीक्षक की शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने प्रदेश के गृह सचिव और अपर पुलिस महानिदेशक को विभागीय कार्यप्रणाली में सुधार लाने के निर्देश दिए।
मंगलवार को जिला कारागार अधीक्षक रीवन सिंह की शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने प्रदेश के गृह सचिव देवाशीष पांडा व अपर पुलिस महानिदेशक (जेल) डा. डीएस चौहान को तलब किया था। एससी आयोग के अध्यक्ष पीएल पुनिया के समक्ष जेल अधीक्षक ने उन्हें कुख्यात अपराधियों की शह पर लगातार परेशान करने की शिकायत की थी, जिसकी सुनवाई के लिए आयोग ने दोनों पक्षों को दिल्ली स्थित मुख्यालय बुलाया था। सुनवाई के दौरान जेल अधीक्षक द्वारा रखे गए अपने पक्ष को सुनने के बाद अध्यक्ष ने जेल प्रशासन व सुधार विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया।
उन्होंने विभाग को कार्यप्रणाली में सुधार लाने के निर्देश दिए। वहीं, गृह सचिव व एडीजी जेल ने सभी आरोपों को नकारते हुए पूरे कार्य को नियमपूर्वक करने की बात कही। आगरा जेल में सुधार कार्यक्रमों के लिए राष्ट्रपति से पुरस्कृत हो चुके जेल अधीक्षक रीबन सिंह को वर्ष 2012 में सोनभद्र जिला के नक्सली इलाके में स्थित जेल में अधीक्षक पद पर तैनात किया गया था। घने जंगल व नक्सली इलाके में बनी इस जेल में कोई कैदी नहीं था।
इसके साथ ही वहां पर बिजली, पानी, वाहन और सुरक्षा कर्मी जैसी कोई सुविधा नहीं थी। घने जंगल में नक्सलियों के बीच सुरक्षा मुहैया कराने को लेकर उन्होंने कई बार प्रशासन को लिखा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि, सोनभद्र के तत्कालीन डीएम, जिला जज, एसपी व एलआईयू विभाग ने प्रशासन को जेल अधीक्षक की जान को खतरा की रिपोर्ट शासन को भेजी दी थी। तीन साल बिना कैदियों की जेल में अधीक्षक की जिम्मेदारी निभाने के बाद वर्ष 2015 में उन्हें ललितपुर जिला जेल का अधीक्षक बनाया गया था। इस मामले की शिकायत जेल अधीक्षक ने अनुसूचित जाति आयोग में की थी।
इनका कहना है
आगरा जेल व अन्य जेलों में तैनाती के दौरान कुख्यात अपराधियों पर अंकुश लगाने के कारण इन अपराधियों ने अपने राजनीतिक सबंधों का इस्तेमाल करके उन्हें लगातार परेशान कराया। एससी आयोग में सुनवाई संतोषजनक रही है।
- रीबन सिंह, जेल अधीक्षक जिला कारागार