ललितपुर। जनपद का चंदन वन अधिकारियों और कर्मचारियों की साठगांठ से उजड़ गया है। बार ब्लॉक में पांच हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस वन से सैकड़ों चंदन के पेड़ जड़ समेत काट लिए गए हैं। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से होने पर शासन ने जांच बैठा दी है। शासन के आदेश पर यह जांच पौधशाला प्रबंधन लखनऊ के मुख्य वन संरक्षक ने ललितपुर आकर की। जांच में कई अफसरों का फंसना तय माना जा रहा है।
बार में स्थित चंदन वन में एक समय चंदन के 1367 पेड़ थे। इनकी सुरक्षा के लिए सुरक्षा बल भी तैनात थे, लेकिन एक-एक कर पेड़ को काटा जाता रहा। यही कारण है कि अब वहां पेड़ कम, पौध ही बची हैं। चंदन के इन पेड़ों की गणना अंतिम बार 19 अगस्त 1998 को की गई थी। वन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक 1998 में पांच से दस इंच व्यास मोटाई के 958, 10 से 15 इंच व्यास मोटाई के 372, 15 से 20 इंच व्यास मोटाई के 32, 20 से 25 इंच व्यास मोटाई के 04 व 25 से 30 इंच व्यास मोटाई का एक पेड़ मौजूद था। वर्तमान में कुछ महीने पहले एक हजार नए चंदन की पौध लगाई गई, जिसमें से 650 पौधे व तीन मोटे वृक्ष ही बचे हैं।
खास बात यह है कि पुराने पेड़ों को जड़ से काटकर निकाला गया, जिससे इस संभावना को बल मिलता है कि इसमें विभागीय अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत है। माना जाता है कि अगर चोर पेड़ काटते, तो वे जड़ को निकालने में कतई नहीं उलझते। मिलीभगत का एक कारण भी माना जा रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ कटने के बाद भी विभाग की ओर से कार्रवाई के लिए प्रशासन व पुलिस से सहायता नहीं मांगी गई। कुछ साल पहले तक जिस वन में केवल चंदन के पेड़ थे, अब उसमें गुज जैसी प्रजातियों को रोप कर मिश्रित वन का स्वरूप दे दिया गया है। पिछले दिनों इस आशय की शिकायत सपा के जिला महासचिव खिलान सिंह यादव ने मुख्यमंत्री से की। शिकायत के आधार पर शासन ने जांच शुरू करा दी है।
शासन के आदेश पर अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक पौधशाला प्रबंधन लखनऊ एमएस भुप्पल गत दिनों ललितपुर आए। उन्होंने बार क्षेत्र में स्थित चंदन वन के दस्तावेजों को देखा। उनका कहना है कि आवश्यक जानकारियां जुटा ली गई हैं। चंदन वन में पेड़ों की गिनती कराई जा रही है। कितने पेड़ गायब हैं, उनके बारे में कितनी एफआईआर दर्ज हुई और जो कटा हुआ चंदन बरामद हुआ, उसे कहां रखा गया है, इसकी जानकारी इकट्ठा की जा रही है। वहीं, इस मामले में डीएफओ वीके जैन का कहना है कि मामले की जांच चल रही है। इस बारे में वह कुछ भी नहीं बता सकते हैं।
यह सवाल फंसाएंगे अफसरों को
-वन विभाग के नियम के अनुसार तबादला होने पर चार्ज लेने वाला अधिकारी उस रेंज में मौजूद संपत्ति का विवरण स्टाक रजिस्टर में दर्ज कराता है, लेकिन चंदन वन के स्टाक रजिस्टर में वर्ष 1998 के बाद से ही इंट्री बंद कर दी गई।
-कई बार चंदन वन से चोरी की गई लकड़ी बरामद की गई, लेकिन इस लकड़ी का भी कहीं कोई स्टाक नहीं रखा गया।
-पेड़ लगातार कटने के बाद भी विभाग ने रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई।
-चंदन वन की सुरक्षा में लगे कर्मचारियों पर भी कार्रवाई करने में कोताही बरती गई।
सुरक्षा के नाम पर लाखों रुपये हुए व्यय
बेशकीमती चंदन वन की सुरक्षा के नाम पर वन विभाग द्वारा लाखों रुपये पानी में बहा दिए गए। वन विभाग के दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2002 से चंदन वन की रक्षा के लिए 24 घंटे सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई। एक दिन में 20 से ज्यादा सुरक्षा कर्मी यहां पर तैनात रहे। इतने कर्मियों के होते हुए भी चंदन वन को बचाया नहीं जा सका।