ललितपुर। बिजली विभाग को और कितनी मौतों को इंतजार है, यह सवाल यूं ही नहीं खड़ा हुआ। जर्जर व गार्डिंग(तारों के नीचे की जाली) के अभाव में हाइटेंशन लाइनों के टूटने से हो चुकी कई मौतों के बाद भी बिजली विभाग सबक नहीं ले रहा है। बजट के अभाव में हाइटेंशन लाइनों की गार्डिंग नहीं बदलवाई जा रही है, तो वहीं जर्जर झूल रहे तारों की मरम्मत नहीं होने से कई लोगों की जिंदगियां दांव पर लगी है।
जनपद में बिजली विभाग द्वारा विभिन्न बिजली सब स्टेशनों से शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में सैकड़ों किलोमीटर लंबी 33 व 11 हजार केवी बिजली लाइन बिछी हुई है। शहरी क्षेत्र में दर्जनों किलोमीटर 11 हजार केवी हाइटेंशन लाइन की गार्डिंग अनेक स्थानों पर टूट चुकी है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में सैकड़ों में भी हाइटेंशन लाइन किसी के खेत से निकली है, तो कहीं सड़क किनारे से निकली है, जिसमें अधिकांश लाइनों के नीचे गार्डिंग नहीं है। टाउन एरिया के भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में गार्डिंग नहीं है।
गार्डिंग के अभाव में हाइटेंशन लाइनों के टूटने से करंट की चपेट में आने से शहर में ही कई लोगों को जान गंवानी पड़ी है। विगत माह ही आजादपुरा में हाइटेंशन लाइन टूटने से एक छात्र की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
जबकि एक छात्र बुरी तरह से घायल हो गया था। हाल ही में रविवार को थाना नाराहट अंतर्गत ग्राम कैथौरा निवासी एक युवक की हाइटेंशन तार की चपेट में आने से मौत हो गई थी। इससे पूर्व भी महरौनी रोड पर करीब एक वर्ष पूर्व एक बस खेतों में मोड़ते समय हाइटेंशन तारों की चपेट में आने से कई लोग झुलस गए थे। वहीं दो वर्ष पूर्व ग्राम ननौरा निवासी तीन युवकों की ग्राम गंगापुर के पास नहर किनारे हाइटेंशन तार टूटने से करंट से मौत हो गई थी।
विभागीय आंकड़ों की बात की जाए तो हर साल करीब दो दर्जन से अधिक मानव व पशुओं की बिजली की दुर्घटनाओं में मौत होने पर आर्थिक राशि मुहैया भी कराई जाती है। जिसमें अब मानव की बिजली दुर्घटना में दो लाख रुपये आर्थिक सहायता दी जाती है, तो दुधारू पशुओं की करंट से मौत पर 16 हजार रुपये आर्थिक सहायता दी जाती है। ऐसे में विभाग द्वारा बिजली दुर्घटनाओं में मौतों पर जब लाखों रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, तो यदि इतनी ही धनराशि बिजली विभाग द्वारा गार्डिंग लगाने व हाइटेंशन लाइनों की मरम्मत में लगा दी जाए, तो काफी हद तक लाइनों में सुुुधार से दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। हालांकि विभाग द्वारा जर्जर हाइटेंशन लाइनों की गार्डिंग व मरम्मत के लिए स्टीमेट बनाकर आलाधिकारियों को तो भेज दिया जाता है, लेकिन बजट के अभाव का हवाला देकर न तो गार्डिंग ही लगाई जा रही है और न ही जर्जर झूल रहे हाइटेंशन तारों की मरम्मत ही की जा रही है।
ग्रामीण इलाकों में रोड क्रास करने वाले तारों की गार्डिंग लगाई जा रही है। वहीं शहरी क्षेत्र में 11 केवी की लाइन को जल्द ही पूरी तरीके से 44 करोड़ की लागत से अंडरग्राउंड किया जाएगा। जिससे यह समस्या खत्म हो जाएगी।
- प्रशांत सिंह अधिशाषी अभियंता विद्युत वितरण खंड