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अस्पताल बना मवेशी व अन्ना जानवरों का अड्ढा

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डोंगराखुर्द /ललितपुर। ब्लॉक मड़ावरा के अंतर्गत ग्राम गौना स्थित न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं। अस्पताल का परिसर मवेशी व अन्ना जानवरों का अड्डा बन गया है। मेडिकल का कचरा खुले में फेंका जा रहा है। लैब टेक्नीशियन के अभाव में जांच सेवाएं ठप पड़ी हैं। फार्मासिस्ट और सफाई कर्मचारी की तैनाती नहीं है।
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स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित क्षेत्रों में बेहतर उपचार की सुविधा के लिए न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसमें एक चिकित्सक, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वॉय, सफाई कर्मचारी चौकीदार आदि पद स्वीकृत किए गए हैं लेकिन अधिकांश न्यू पीएचसी अनदेखी के चलते बदहाल स्थिति में पहुंच गई हैं। ऐसी ही स्थिति न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गौना की है। यहां पर अस्पताल का पंजीयन बायोमेडिकल वेस्ट मटीरियल उठान के लिए है लेकिन मेडिकल कचरा खुले में फेंका जा रहा है। इससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बना हुआ है। वहीं अस्पताल में चौकीदार व सफाई कर्मचारी न होने से अस्पताल परिसर में खुले में अन्ना जानवर व मवेशियों को अड्ढा बन गया है।
जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर गौना में न्यू पीएचसी स्थापित किया गया है, लेकिन अब तक प्रसव की सुविधा नहीं है। ऐसे में गर्भवती प्रसूताओं को प्रसव के लिए बिरधा आना पड़ता है।
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स्टाफ का है अभाव, लैब टेक्नीशियन के अभाव में नहीं हो रहीं जांच
अस्पताल में स्वीकृत पदों के सापेक्ष कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। सफाई कर्मचारी व फार्मासिस्ट को अन्य स्थानों पर तैनात किया गया है। इससे अस्पताल में आने वाले मरीजों के चिकित्सक ही पर्चा बना रहे हैं। दवाएं भी चिकित्सक द्वारा भी दी जा रही हैं। ऐसे में मरीजों को उपचार में अधिक समय लग रहा है। सफाई कर्मचारी के अभाव में व्यवस्थाएं भी चौपट हैं। वहीं, न्यू सीएचसी मेें वर्तमान में इकलौते चिकित्सक व एक स्टाफ नर्स की तैनाती है। लैब टेक्नीशियन की नियुक्ति नहीं हो सकी है। ऐसे में यहां पर आने वाले मरीजों के मर्ज की जांच नहीं हो पाती है। सामान्य उपचार ही मिल पा रहा है। मर्ज की जांच के अभाव में मरीजों को निजी चिकित्सक व जिला मुख्यालय की ओर रुख करना पड़ता है।
अस्पताल के द्वारा है जलभराव
संक्रामक व मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम को संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें दस विभाग शामिल किए गए हैं। इसका नोडल स्वास्थ्य विभाग को बनाया गया है, लेकिन जिम्मेदार अपने ही परिसर को स्वच्छ नहीं रख पा रहे हैं। यहां पर जलभराव बना हुआ है। इसमें मवेशी बैठी रहती हैं। मरीजों को भी संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है।
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हैंडपंप पड़ा खराब
परिसर में जगह-जगह कचरा फैला हुआ है। इतना ही नहीं खुले में ही बायोमेडिकल वेेस्ट मटीरियल फेंका जा रहा है। अस्पताल में लगा इकलौता हैंडपंप भी वर्षों से खराब पड़ा है। इससे अस्पताल को पानी के लिए बिजली के सहारे रहना पड़ रहा है।
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अस्पताल में स्टाफ की कमी है। सफाई कर्मचारी को अमझरा घाटी सीमा पर हो रही जांच में तैनात किया गया है। फार्मासिस्ट को डोंगराखुर्द में नियुक्त किया गया है। इससे कर्मचारियों की कमी बनी हुई है।
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डॉ. कुलदीप राजपूत, चिकित्साधिकारी
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