ललितपुर। वेतन वृद्धि के साथ राज्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर 5 सितंबर से चल रही आशाओं की हड़ताल रविवार को भी जारी रही। उन्होंने पल्स पोलियो कार्यक्रम का बहिष्कार कर प्रदर्शन किया। आशा कार्यकत्री कर्मचारी महासंघ के बैनर तले रविवार को आशाओं ने शहर के प्रमुख मार्गों से जुलूस निकालते हुये विरोध प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष आशा यादव ने कहा कि शासन की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजनाओं को धरातल पर अमलीजामा पहनाने का कार्य आशाओं द्वारा किया जाता है। आशा ग्रामीण अंचलों में जाकर प्रसूताओं को समय पर टीकाकरण से लेकर प्रसव तक देखभाल करतीं हैं, तब कहीं जाकर उन्हें मानदेय के रूप में चंद रुपये ही मिलते हैं। जितना मानदेय मिल रहा है, उतने में परिवार का भरण पोषण नहीं हो पाता है।
राष्ट्रीय कार्यक्रम पल्स पोलियो में ड्यूटी करने पर 75 रुपये मानदेय दिया जाता है, जबकि इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए आशा बहुओं का यात्रा करने या फिर अन्य साधनों से पहुंचने में इससे कहीं अधिक धनराशि खर्च हो जाती है। उन्होंने कहना कि मनरेगा में कार्य करने वाले मजदूरों को भी इतने ही समय कार्य करने पर 350 रुपये दैनिक मजदूरी मिलती है, जिससे आशा बहुओं को मजदूरों से भी बदत्तर जिन्दगी यापन करनी पड़ रही है।
आशा बहुओं ने वेतन वृद्धि किये जाने, भत्ते बढ़ाये जाने एवं राज्य कर्मचारी का दर्जा दिये जाने की मांग को मंच से उठाया। इस दौरान निकाली गयी रैली में नारेबाजी करते हुये आशा बहुओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान जिलाध्यक्ष आशा यादव, मालती यादव, संगीता दुबे, किरन, विजय यादव, मीरा, रामा बैजनाथ, रचना जैन, नीतू रानी, अफरोज, इन्द्रकुमारी, माया, बेबी राजा, फूलकुंवर, रेनुका, प्रभादेवी, बबीता तिवारी, जयन्ती, सरोज, संगीता दुबे, रूबी, रेखा, क्रान्ति, बबली, माखनदेवी, रचना, मीरा समेत अनेकों आशा बहुएं मौजूद रहीं।