ललितपुर। जिले में आम आदमी के स्वास्थ्य के साथ अधिकारी खिलवाड़ कर रहे हैं। यहां पर 72 होम्योपैथिक क्लीनिक चल रहे हैं, लेकिन पंजीकरण सिर्फ 15 क्लीनिक का है। इसके बाद भी ऐसे क्लीनिकों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
शासन ने क्लीनिक खोलने के लिए नियम निर्धारित किए हैं। इसमें चिकित्सक की डिग्री की जांच होती है, फिर क्लीनिक के मानकों की जांच की जाती है। क्लीनिक खोलने के लिए एक सौ वर्ग फीट का कमरा होना चाहिए। इसमें एक फ्रिज व कमरे को पूरी तरह से बंद रहना चाहिए। दुकान में धूल के कणों को रोकने की व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन, जिले में बिना पंजीयन के क्लीनिक संचालित किए जा रहे हैं। इसकी हकीकत विभागीय आंकड़े बता रहे हैं।
जिले में लगभग 72 होम्योपैथिक चिकित्सक क्लीनिक चला रहे हैं, लेकिन विभाग के आंकड़ों में सिर्फ 15 होम्योपैथिक चिकित्सकों के क्लीनिक पंजीकृत है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं कई होम्योपैथिक चिकित्सक न तो क्लीनिक के मानकों का पालन कर रहे हैं और न ही विभागीय नियमों का पालन कर रहे हैं। अधिकांश क्लीनिक खुले में चल रहे हैं। ऐसे क्लीनिकों पर मरीज के देर तक रुकने से मर्ज बिगड़ने का भी खतरा बना रहता है। साथ ही धूल से एलर्जी वाले मरीजों को भी परेशानी हो सकती है। इसके बाद भी न तो जिम्मेदार कार्रवाई कर रहे हैं और न ही नियमों का पालन करा रहे हैं।
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कई कर रहे थोक दवा बिक्री का कारोबार
कई होम्योपैथिक चिकित्सक डिग्री की आड़ में क्लीनिक के नाम पर दवाएं बेचने का कारोबार कर रहे हैं। कुछ चिकित्सक क्लीनिक में ही मरीजों को दवा उपलब्ध करा रहे हैं। दवा के एवज में मरीजों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। अधिक कमाई के चक्कर में सस्ती दवाएं मरीजों को दे रहे हैं।
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जिलाधिकारी व मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा बगैर पंजीकृत क्लीनिकों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। शीघ्र ही अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
- डा. राजेश भारती
नोडल अधिकारी