ललितपुर। तीन दिन पहले शहर के नामी होटल आर्यन इन में काम कर रहे दो श्रमिकों की हाइटेंशन लाइनों की चपेट में आने से मौत हो गई थी। लेकिन शहर में इस प्रकार की यह पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व में भी कई बार इस प्रकार के हादसे हाइटेंशन लाइनों की चपेट में आने के दौरान घटित हो चुके हैं, जिसमें कई परिवारों ने अपने घर के सदस्य खो दिए हैं। इसके बाद भी बिजली विभाग एवं शासन प्रशासन ने सबक नहीं लिया है। पिसनारी मुहल्ले में हाइटेंशन लाइनों के नीचे दर्जनों मकान बनकर तैयार हो गए हैं और उनकी छतों पर मासूम बच्चे हाइटेंशन लाइनों के नीचे हर रोज खेलते नजर आ जाते हैं। वहीं अब भी यहां कई निर्माण कार्य चल रहा हैै।
मोहल्ला पिसनारी में हाइटेंशन लाइन के नीचे पूरा एक मुहल्ला ही बस गया है। नहर के किनारे कुछ मीटर अंदर की ओर एक पूरी बस्ती ही नेहरू नगर फीडर की हाइटेंशन लाइनों के नीचे तैयार हो गई है, जबकि बहुत से मकानों का निर्माण कार्य चल रहा है। लेकिन यहां न तो मकान बनाने से रोकने के लिए कोई ठोस कार्रवाई अमल में लाई गई और न ही यहां से लाइनों को ही शिफ्ट किया गया। यहां हाइटेंशन मौत की विद्युत लाइनें मकानों की छतों के ऊपर बिल्कुल मध्य से मात्र तीन से चार फुट की ऊंचाई से ही गुजरी है। भवन स्वामियों द्वारा इन विद्युत लाइनों को ऊपर उठाने के लिए लकड़ियों की बल्लियां तक छतों पर लगाई गई हैं। जबकि छतों पर इन हाइटेंशन लाइनों के नीचे से निकलना भी मुश्किल है और बारिश के दिनों में तो अक्सर यहां करंट का भारी खतरा बना रहता है। मकानों के निर्माण के दौरान तो यहां कई मजदूरों को करंट तक लग चुका है। लेकिन अब तक यहां से लाइनों को हटाया नहीं गया है। इसके चलते आज भी यहां हाइटेंशन मौत की लाइनों के नीचे दर्जनों जिंदगियां रहकर गुजर बसर कर रही हैं, जो मौत के खतरे के बीच रहने को मजबूर हैं। यहां तक इन लाइनों के नीचे कई बार तो छोटे-छोटे मासूम बच्चे भी परिजनों के नहीं होने के चलते खेलते देखे जा सकते हैं। इन हाइटेंशन लाइनों के नीचे बस गए मकानों में रहने वाले लोगों की जिंदगी सुरक्षित करने के लिए शासन प्रशासन और बिजली विभाग को जल्द ही लाइनों को हटाने के लिए कोई ठोस निर्णय लेने की आवश्यकता है। अन्यथा की स्थिति में यहां भी गंभीर हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। शहर में गत रोज होटल आर्यन इन में हाइटेंशन तारों की चपेट में आने के दौरान घटी यह पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व भी एक बार आजादपुरा में हाइटेंशन लाइन का तार टूटकर गिरने से एक व्यक्ति की मौत करीब चार वर्ष पूर्व हो गई थी। इसी प्रकार नेहरू नगर और मुहल्ला पठापुरा व तालाबपुरा में भी घरों की छतों के पास से निकली हाइटेंशन लाइन के तार छू जाने से मौतें हो चुकी है, जबकि कई लोग झुलस गए थे। इसी प्रकार करीब चार वर्ष पूर्व ही बांसी के पूर्व जखौरा रोड पर नहर किनारे हाइटेंशन तार टूटने पर करंट की चपेट में आने से ग्राम ननौरा निवासी तीन किसानों की मौतें हो गई थीं। इतनी घटनाओं के बाद भी विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि विभाग के नियम के तहत हाइटेंशन लाइन के नीचे निर्माण से पूर्व परमीशन लेना और लाइनों को हटवाने के लिए एस्टीमेट और उसकी राशि जमाकर कार्रवाई करवाना जरूरी होता है, जो अधिकांश लोग समय रहते इससे बचते रहते हैं और हादसों के बाद विभाग को कोसते भी नजर आते हैं।
गार्डिंग के बिना भी बना रहता हादसों का खतरा
विद्युत विभाग द्वारा शहर को रोशन करने के लिए कहीं 11 हजार केवी तो कहीं 33 केवी हाइटेंशन लाइनों का जाल फैला गया है। ऐसे में नियमत: विद्युत विभाग द्वारा जहां भी हाइटेंशन लाइनें बिछाई गई हैं, वहां भीड़भाड़ वाले इलाकों, चौराहों, तिराहों व मुहल्लों व बस्तियों से निकलने वाली हाइटेंशन लाइनों के नीचे लोहे गार्डिंग लगाना अनिवार्य होता है। लेेकिन शहर में अब भी कई जगह हाइटेंशन लाइनों के नीचे गार्डिंग ही नहीं लगी है, जबकि लाइन चार्ज है। शहर में मैन रोड पर वर्णी चौराहा से रेलवे स्टेशन तक हाइटेंशन लाइनों के नीचे से भी गार्डिंग नहीं लगी है।
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इनका कहना है-
हाइटेंशन लाइनों के नीचे जो भी निर्माण हो गया है, उसकी जल्द ही जांच कराई जाएगी और इन लाइनों को हटाने के लिए नियमानुसार कार्रवाई कराई जाएगी, ताकि हाइटेंशन करंट के दौरान फिर से दूसरा कोई हादसा न हो सके।
शैलेंद्र कुमार कटियार, अधिशासी अभियंता प्रथम, विद्युत वितरण खंड ललितपुर।