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Lalitpur News: 77 स्कूलों के ऊपर अब भी लटक रहे हाईटेंशन तार, 10 हजार बच्चों की जान पर खतरा

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संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। जिले के 77 परिषदीय विद्यालयों के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन विद्युत लाइनें करीब 10 हजार बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनी हुई हैं। लाइन शिफ्टिंग के लिए बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा दो वर्ष पूर्व बिजली विभाग को लगभग 55 लाख रुपये जमा कराए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद आज तक तार नहीं हटाए गए। इससे अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों में हर समय अनहोनी की आशंका बनी रहती है।
जिले में 1,357 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें करीब 1.22 लाख छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने जर्जर भवनों में कक्षाओं का संचालन बंद कराने और खतरनाक पेड़ों को हटाने जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन विद्यालय परिसरों और भवनों के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइनें अब भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। शासन के निर्देश पर वर्ष 2024-25 में कराए गए सर्वे में जिले के 77 विद्यालय ऐसे चिह्नित किए गए थे, जिनके ऊपर या परिसर से होकर हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। इनमें बार ब्लॉक के 11, मड़ावरा के छह, बिरधा के 17, महरौनी के 10, जखौरा के 23 और तालबेहट के 10 विद्यालय शामिल हैं।
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इन लाइनों को हटाने के लिए बिजली विभाग ने आकलन तैयार कर भेजा था, जिसके आधार पर करीब दो वर्ष पहले 55 लाख रुपये की धनराशि विभाग को उपलब्ध करा दी गई। इसके बाद उम्मीद थी कि जल्द ही खतरा टल जाएगा, लेकिन दो साल बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, लाइन हटाने के लिए बिजली विभाग को एक दर्जन से अधिक पत्र भेजे जा चुके हैं। हाल ही में विभाग ने जमा कराई गई धनराशि के उपयोग की जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में बिजली विभाग ने गलती से माध्यमिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों से संबंधित विवरण भेज दिया। बाद में इसे मानवीय त्रुटि बताते हुए सुधार किया गया।तेज हवा चलने के दौरान इन लाइनों में कई बार स्पार्किंग भी होती है। इससे विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे और शिक्षक हमेशा भय के साये में रहते हैं। अभिभावकों को भी आशंका बनी रहती है कि कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए।
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77 विद्यालयों के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइनें हटाने के लिए करीब दो वर्ष पहले 55 लाख रुपये बिजली विभाग को उपलब्ध करा दिए गए थे। इसके बावजूद अब तक कार्य पूरा नहीं हुआ है। विभाग को कई बार पत्र भेजे जा चुके हैं और उच्चस्तरीय बैठकों में भी मामला उठाया गया है।
जाहर सिंह निरंजन, डीसी निर्माण
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