ललितपुर। बढ़ते स्वाइन फ्लू (एच 1 एन 1) के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है। मेडिकल कॉलेज में 10 बेड का विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार करने के साथ नोडल अधिकारियों की नियुक्ति और मेडिकल स्टाफ को वैक्सीन लगाना शुरू कर दिया है। साथ ही चिकित्सकों ने स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए एडवाइजरी भी जारी की है।
स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को लेकर सतर्क हो गया है। मेडिकल कॉलेज में छठवीं मंजिल पर दस बेड का विशेष वार्ड तैयार किया गया है। स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचने वाले लोगों को बीमारी के लक्षणों की जानकारी दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने सहायक आचार्य डॉ. निखिल को इसके लिए नोडल भी बनाया गया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग द्वारा एहतियातन स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए मेडिकल कॉलेज के स्टाफ को वैक्सीन भी लगाना शुरू कर दिया है, ताकि यदि कोई स्वाइन फ्लू के मरीजों के संपर्क में आता है तो पहले से वैक्सीन लगी होने से बचाव हो सके। इसमें मेडिकल कॉलेज के ओपीडी, इमर्जेंसी, आईसीयू, स्वाइन फ्लू वार्ड में कार्यरत सभी डॉक्टर, स्टाफ नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, नमूनों की जांच करने वाले कर्मचारी को वैक्सीन लगाई जा रही है।
फ्लू का बढ़ता खतरा: सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
स्वाइन फ्लू से घबराने की नहीं, बल्कि जागरूक रहने की जरूरत है। लक्षणों को नजरअंदाज न करें, स्वयं दवा लेने से बचें और गंभीर या लगातार बढ़ते लक्षणों में समय पर डॉक्टर से संपर्क करें।-डॉ.निखिल, सहायक आचार्य मेडिसिन।
फ्लू के प्रमुख लक्षण
फ्लू की शुरुआत अक्सर अचानक होती है। इसके प्रमुख लक्षणों में बुखार या ठंड लगना, खांसी, विशेषकर सूखी खांसी, गले में खराश, नाक बहना या नाक बंद होना, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, अत्यधिक थकान और कमजोरी, कुछ बच्चों में उल्टी या दस्त भी हो सकते हैं। चिकित्सकों के अनुसार खांसी और कमजोरी बुखार ठीक होने के बाद भी कुछ समय तक रह सकती है।
इन्हें सतर्कता की अधिक जरूरत
फ्लू की जटिलताओं का खतरा विशेष रूप से बुजुर्ग व्यक्ति, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, अस्थमा या अन्य फेफड़ों की बीमारी वाले मरीज, अत्यधिक मोटापे से ग्रसित व्यक्तियों में रहता है। इनमें फ्लू के कारण निमोनिया, सांस की गंभीर समस्या और पहले से मौजूद बीमारी के बिगड़ने जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। यदि बुखार और खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, ऑक्सीजन की कमी, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम या अत्यधिक नींद, पानी न पी पाना या शरीर में पानी की कमी जैसे लक्षण हों तो ऐसे में तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।