मृतक के नाती अंकित ग्वाला ने बताया कि उसके दादा हरीराम के एक पैर में चोट आने पर मध्य प्रदेश के सागर की अस्पताल में पंद्रह दिन पहले रॉड डाली गई थी। जिसके चलते वह चल फिर नहीं सकते थे। 11 अगस्त की रात में करीब नौ बजे दादा हरीराम की हालत बिगड़ने पर 108 एंबुलेंस के लिए फोन लगाया, लेकिन जब एंब़ुलेंस काफी देर तक नहीं आई तो मजबूरन बारिश होने के दौरान दादा को हाथ ठेला पर लिटाकर जिला अस्पताल ले जाना पड़ा, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उसने कहा कि यदि एंबुलेंस समय से आ गई होती तो उसके दादा का जिला अस्पताल में इलाज हो जाता और वह शायद आज उनके बीच होते। उसने बताया कि उसके दादा शहर के प्रसिद्घ मोती मराज मंदिर मोहल्ला घुसयाना के पंडा थे, जो मंदिर की सेवा में लगे रहे। मृतक के दो बेटे हैं।
शव के घर पहुंचने के बाद आई एंबुलेंस
मृतक हरीराम के नाती अंकित ने बताया कि जब चिकित्सकों ने उसके दादा को मृत घोषित कर दिया, तब वह उसी हाथ ठेला पर दादा के शव को घर ले आए। इसके बाद एंबुलेंस वालों का फोन आया कि एंबुलेंस आ गई है।