मंगलवार शाम आंधी के साथ हुई बारिश से तहसील क्षेत्र के लोगों को भारी नुकसान हुआ है। ग्राम नटयाने में चार इंदिरा आवास ढह गए। वहीं, कई जगह कच्चे मकान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। पान किसानों के बरेजे धराशायी हो गए हैं। अलग-अलग जगह करीब तीन दर्जन से अधिक विद्युत खंभे क्षतिग्रस्त हो गए हैं। बड़ी संख्या में पेड़ भी धराशायी हो गए हैं। वहीं, दो सरकारी स्कूलों की दीवारें ढह गईं।
आंधी-बारिश से सबसे बड़ा नुकसान पान किसानों को हुआ है। मार्च-अप्रैल में बांस-बल्ली तार और घासफूस से लाखों रुपए खर्च कर तैयार किए गए पान के बरेजे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इन किसानों को सरकारी लाभ भी मिलने की संभावना कम दिखती है, क्योंकि पान की खेती कृषि कार्यों में शामिल नहीं है। नीलकंठ मार्ग पर बने पान बरेजे, नागौरी, कठोरया, मुललयु क्षेत्र में बने पान बरेजे सैकड़ों की संख्या में धराशायी हो गए हैं। पान किसान खेमचन्द्र पटवारी, देवेंद्र चौरसिया ने बताया कि भारी मात्रा में नुकसान हो गया है। राजस्व कर्मचारियों द्वारा नुकसान का सर्वे होना चहिए। यदि आर्थिक मदद नहीं मिली तो पान किसान पलायन को मजबूर हो जाएंगे।
ग्राम चंदेरा में काशीराम, कृपाल के कच्चे मकान पर पेड़ गिर गया। परिजन तो बाहर निकल गए, लेकिन घर में बंधी भैंस उसकी चपेट में आकर बुरी तरह जख्मी हो गई है। पाली निवासी पप्पू कुशवाहा, महेश परोचे की छत भी उड़ गई, इससे गृहस्थी का सामान नष्ट हो गया। ग्राम नटयाने में चार इंदिरा आवास धराशायी हो गए। नटयाना-चंदेरा गांव के बीच लगे करीब तीन दर्जन से ज्यादा विद्युत पोल टूटे पड़े है। खेतों में नलकूपों के लिए रखे छह ट्रांसफार्मर भी जमीन पर गिरकर क्षतिग्रस्त हो गए। दो सरकारी स्कूलों की चाहरदिवारी भी ढह गई है। पेड़ गिरने से सड़के जाम की स्थिति बनी रही। राजस्व अधिकारियों ने इस गांव में नुकसान का आंकलन किया है।
बिजली आपूर्ति ठप होने से जलापूर्ति बाधित
आंधी-बारिश जगह-जगह विद्युत पोल धराशायी पड़े हैं। इससे आपूर्ति ठप है। जल संस्थान की सप्लाई, पाइप जल योजना की सप्लाई विद्युत सप्लाई पर निर्भर होने के चलते बाधित हो गई है। ऐसे में पाली की प्यास हैंडपंपों के सहारे ही बुझेगी।