ललितपुर। नगर की सीमा के अंदर व बाहर स्थित गरीबों के लिए बनाई गई कांशीराम आवास कालोनियों में सुविधाओं का हाल-बेहाल है। सुरई घाट कालोनी में तो डेढ़ साल से पाइप लाइन लीकेज हो रही है, इससे कालोनी के 1000 परिवार बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। इससे नाराज कालोनी की महिलाओं ने शुक्रवार को जल निगम के अधिशासी अभियंता का घेराव किया।
पिछली सरकार के शासन काल में गरीबों के लिए नगर के सात स्थानों पर कांशीराम आवासीय कालोनियां का निर्माण किया गया। इसमें करीब पांच हजार से अधिक परिवार अपने परिजनों के साथ निवास कर रहे हैं। कालोनी में सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए पाइप लाइन या नलकूप के माध्यम से जलापूर्ति की व्यवस्था की गई। शौच की सुविधा के लिए सामुदायिक शौचालय बनाए गए। तीन मंजिला इन इमारतों पर पानी चढ़ाने के लिए पानी की टंकियों का निर्माण किया गया। विद्युत मोटरें भी लगाई गईं। सुविधाएं सुचारु रूप से चलती रहें, इसको देखते हुए जल निगम यांत्रिक व जल संस्थान को जिम्मेदारी दी गई। लेकिन, विभागीय अफसर समय के साथ उदासीन होते चले गए।
उन्होंने कालोनी में रहने वाले गरीबों की ओर देखना ही बंद कर दिया। सुरई घाट कांशीराम आवास कालोनी में 1000 परिवार निवास करते हैं। इस कालोनी में पिछले डेढ़ साल से पानी की समस्या चली आ रही है। पाइप लाइन लीकेज होने के कारण नीचे तक ही पानी आ पा रहा है। ऊपरी मंजिल पर रहने वाले अधिकांश परिवार सालों से बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हो रहे हैं। कालोनीवासियों का कहना है कि जल निगम के जिम्मेदार अफसरों को दर्जनों प्रार्थनापत्र दिए जा चुके हैं, लेकिन उन्होंने गरीबों की सुनना ही बंद कर दी है। इससे परेशान कालोनी की महिलाओं ने शुक्रवार को अधिशासी अभियंता यशवीर सिंह का घेराव किया और पानी पहुंचाने की मांग की। व्यवस्था सुधारने के आश्वासन के बाद महिलाएं चली गईं।
खिरकापुरा में भी है समस्या
खिरकापुरा स्थित कांशीराम आवास कालोनी में ही पानी की समस्या चली आ रही है। कालोनीवासी निचले तल पर लगे हैंडपंप से पानी ढोने को मजबूर हैं। कालोनीवासियों का कहना है कि कई बार बिजली नहीं आती है तो कई बार मोटर नहीं चलाने के कारण पानी की टंकी नहीं भरती है।
इनका कहना है-
सुरई घाट कालोनी में पाइप लाइन के रख-रखाव के लिए कोई धनराशि नहीं दी जाती है। पाइप लाइन खराब है, लेकिन नहीं सुधरवा पा रहा हूं। जल संस्थान को हैंड ओवर के लिए कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकल सका है।
यशवीर सिंह, अधिशासी अभियंता जल निगम यांत्रिक