ललितपुर। कुछ साल पहले तक यहां ग्रेनाइट टाइल्स का उद्योग चरम पर था। कुल 45 यूनिटें चल रही थीं, लेकिन सात साल पहले प्रदेश सरकार ने ग्रेनाइट पर रॉयल्टी बढ़ा दी, जो अन्य प्रदेशों के मुकाबले पांच गुनी तक हो गई। इस कारण यहां का पत्थर महंगा हो गया और टाइल्स की लागत बढ़ने से मांग में भारी कमी आ गई। अब यहां सिर्फ नौ यूनिटों का संचालन हो रहा है।
वर्ष 1990 में ग्रेनाइट खदानें शुरू हुईं। यहां का ग्रेनाइट देश-विदेश तक जाने लगा। वहीं, 1993 से ग्रेनाइट टाइल्स का कार्य प्रारंभ हुआ। 2004 तक ग्रेनाइट टाइल्स तैयार करने वाली 45 से अधिक यूनिटों की स्थापना हुई। वर्ष 2017-18 में शासन ने खनिज की रॉयल्टी बढ़ा दी, जिसमें सबसे ज्यादा ग्रेनाइट पत्थर पर रॉयल्टी बढ़ाई गई। प्रदेश में एक घनमीटर पर पांच हजार रुपये की रॉयल्टी लगा दी। यह जनपद से सटे प्रदेश मध्यप्रदेश व राजस्थान से पांच गुना है। मध्यप्रदेश व राजस्थान में एक हजार रुपये प्रति घनमीटर की रॉयल्टी है।
कच्चा माल महंगा होने से टाइल्स की कीमतें बढ़ती गईं, जबकि जनपद से सटे मध्यप्रदेश में सस्ते दामों में टाइल्स मिलने के कारण बाजार में ललितपुर ग्रेनाइट टाइल्स की मांग कम हो गई। यही कारण रहा कि यहां से धीरे-धीरे लोगों ने अपनी यूनिटों को हटा लिया। अभी जो लोग यह कार्य कर रहे हैं, वह मध्यप्रदेश व राजस्थान से पत्थर मंगाकर किसी तरह अपना काम चला रहे हैं। इन उद्यमियों ने कई बार जनपद से लेकर शासन स्तर के अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन रॉयल्टी को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
तत्कालीन जिलाधिकारी ने लिखा था शासन को पत्र
उद्यमियों की मांग पर तत्कालीन जिलाधिकारी योगेश शुक्ला ने शासन को ग्रेनाइट पर रॉयल्टी कम करने के लिए पत्र लिखा था। उन्होंने भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के सचिव को लिखे पत्र में प्रदेश व अन्य प्रदेशों की रॉयल्टी का जिक्र करते हुए इसे उद्यमियों के हित में कम करने की मांग रखी थी।
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पर्याप्त बिजली भी न मिलने के कारण परेशानी
पूर्व में जहां औद्योगिक आस्थान को 24 घंटे विद्युत आपूर्ति मिलती थी, वहीं अब इसमें कटौती हो रही है। इसके चलते भी उद्यम प्रभावित हो रहा है।