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सहरिया आदिवासियों की तकदीर नहीं बदल पाई सरकारी योजनाएं

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घर में ताला लगाकर मजदूरी करने गया सहरिया परिवार - फोटो : LALITPUR
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डोंगराखुर्द/ललितपुर। केंद्र एवं प्रदेश सरकार की तमाम योजनाएं जिले के सहरिया आदिवासियों की तकदीर नहीं बदल पाई हैं। आज भी तमाम परिवार झोपड़ियों में रहने के लिए मजबूर हैं। इतना ही नहीं, सहरियों का पलायन रोकने में मनरेगा नाकाम साबित हो रही है।
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मुख्य धारा से कटे लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने के मकसद से केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा अनेक जनकल्याण की योजनाएं चलाईं जा रही हैं। इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छता मिशन अंतर्गत शौचालय निर्माण, मनरेगा, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सस्ती दरों पर अनाज, विभिन्न पेंशन योजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं का लाभ चंद लोगों तक ही पहुंच पा रहा है।
मनरेगा में स्थानीय स्तर पर रोजगार व समय से भुगतान नहीं होने की समस्या बनी हुई है। इस कारण कई परिवार महानगरों की ओर रुख कर लेते हैं, ऐसा नहीं कि विभागीय अफसर इससे परिचित नहीं हैं लेकिन वह चुप्पी साधे रहते हैं। झोपड़ियों में रहना बारिश में सीजन में सबसे ज्यादा कठिन हो जाता है। विकास खंड मड़ावरा के गांव पारौल में सौ सहरिया परिवार निवास करते हैं लेकिन आधे से ज्यादा आदिवासी परिवारों को आवास नहीं मिल पाए हैं। अन्य गांवों में भी लगभग ऐसे ही हालात देखे जा सकते हैं। आदिवासी महिलाओं ने बताया कि आवास से लेकर अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। आवास की आस लगाए कई साले बीत गए लेकिन आवास नहीं मिल पाया है।
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मुझे सरकारी योजनाओं का लाभ नही मिल पाया है, चाहे वह राशन कार्ड, आवास, पेंशन आदि योजना क्यों न हो। इससे जीवनयापन करने में कठिनाई हो रही है। - हल्की बहू
काफी मशक्कत के बाद जॉब कार्ड तो बनवा लिया लेकिन मजदूरी आज तक नहीं मिली है। सरकार द्वारा चलाई जा रही मनरेगा योजना का लाभ भी नहीं मिल पाया है।- राजाराम सहरिया
जॉब कार्ङ के अभाव में स्थानीय स्तर पर रोजगार नहीं मिल पाता है। इस कारण मजदूरी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। कभी-कभी तो बिना मजदूरी के महीनों के गुजर जाते हैं। ऐसे में उधारी से घर का चूल्हा जलता है।-गनपत सहरिया
गरीबी के दिनों से छुटकारा नहीं मिल पाया है। कल भी परेशान थे और आज भी वही हालात हैं। हम लोगों की कोई सुनता तक नही है, जिससे बाहर मजदूरी करने के लिए जाना पड़ता है। - कुवंर बाई सहरिया

झोपड़ी में बैठी आदिवासी महिला- फोटो : LALITPUR

पुरा पाचौनी कच्चे के घर सामने लगी झाड़ियों की बाड़ी- फोटो : LALITPUR

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