प्लांट स्थापना के लिए कंपनी ने मांगा 0.013 टीएमसी पानी, विकल्प तलाश रहा सिंचाई विभाग
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जनपद में अत्याधुनिक ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। ओसियार ग्रुप द्वारा प्रस्तावित इस प्लांट के लिए शासन ने सिंचाई विभाग से 0.013 टीएमसी ( हजार मिलियन क्यूबिक फीट) पानी की उपलब्धता को लेकर आख्या मांगी है। शासन के निर्देश पर सिंचाई विभाग पानी उपलब्ध कराने के संभावित विकल्पों की तलाश में जुट गया है।
जिले में निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन की ओर से समय-समय पर इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की जाती रही है। प्रशासन के इन प्रयासों का असर यह रहा कि जिले में करोड़ों रुपये की लागत से सौर ऊर्जा प्लांटों के प्रस्ताव आए हैं। वर्तमान में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में कई सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित हो रहे हैं, जिनमें से कुछ अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं। इसी क्रम में अब जिले में ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट की स्थापना का प्रस्ताव सामने आया है।
ओसियार ग्रुप द्वारा लगभग 1200 करोड़ रुपये की लागत से यह प्लांट लगाया जाएगा। इनवेस्ट यूपी में दिए गए प्रस्ताव के क्रम में शासन ने सिंचाई विभाग को पत्र जारी कर हाइड्रोजन उत्पादन के लिए 0.013 टीएमसी पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा है। इसके बाद सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों ने जनपद स्तर से आख्या मांगी है।
बताया जा रहा है कि ब्लॉक बिरधा क्षेत्र से होकर गुजरने वाली बेतवा नदी से पानी लेने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, हाइड्रोजन उत्पादन के लिए इलेक्ट्रोलाइसिस प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा की मदद से पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया पर्यावरण के लिहाज से पूरी तरह प्रदूषण मुक्त है। यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं तो आने वाले समय में जनपद ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाएगा।
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स्थानीय युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर
ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट की स्थापना से जहां जिले में बड़ा औद्योगिक निवेश आएगा, वहीं इसके माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। इससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कार्बन डाइऑक्साइड से बनेगी मेथनॉल
पानी से हाइड्रोजन बनाने की प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन को अलग किया जाएगा। इसके बाद बची हुई कार्बन डाइऑक्साइड से मेथनॉल तैयार की जाएगी। वर्तमान में मेथनॉल का उत्पादन कोयले से किया जाता है।
फैक्ट फाइल : जिले में सौर ऊर्जा की स्थिति
7 प्रस्ताव, कुल निवेश : 16,650 करोड़ रुपये
982 मेगावाट उत्पादन का लक्ष्य
6 प्लांटों से 91 मेगावाट का उत्पादन जारी
ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट के लिए अभी भूमि का चयन नहीं हो सका है। जल्द ही उपयुक्त भूमि चिह्नित कर कंपनी को उपलब्ध कराई जाएगी।
— सत्यप्रकाश, जिलाधिकारी