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कोचिंग चलाने में जीआईसी प्रवक्ता निलंबित

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कोचिंग चलाने में जीआईसी प्रवक्ता निलंबित
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ललितपुर। राजकीय इंटर कालेज के रसायन विज्ञान के प्रवक्ता को कोचिंग सेंटर चलाना महंगा पड़ गया है। अपर शिक्षा निदेशक ने एलआईयू की गोपनीय जांच के आधार पर उन्हें निलंबित कर दिया है।
सरकारी सेवकों के लिए कोचिंग चलाने पर मनाही है। इसके लिए कोचिंग अधिनियम बनाया गया है। इसके बाद भी कुछ सरकारी सेवक अतिरिक्त कमाई के लिए नियमों को धता बताते हुए इस धंधे में उतर आए हैं। कोई पंजीकृत कोचिंग में ट्यूशन देने पहुंच रहा है तो किसी ने परिजन एवं रिश्तेदार के नाम से कोचिंग सेंटर का पंजीकरण करा लिया है।
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राजकीय इंटर कालेज के रसायन विज्ञान के प्रवक्ता पर कोचिंग चलाने के आरोप अक्सर लगते रहे हैं। दो साल पहले इसकी शिकायत जिलाधिकारी से की गई थी। इस पर उन्होंने इसकी गोपनीय जांच एलआईयू से कराई। इसमें प्रथम दृष्टया लगाए गए आरोप सही पाए गए। जिलाधिकारी ने एलआईयू की आख्या के आधार पर रसायन विज्ञान के प्रवक्ता के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिख दिया। शासन ने प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए उनका स्थानांतरण गैर जनपद कर दिया, लेकिन वे अपना तबादला रुकवाने में कामयाब हो गए। हाल ही में अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक अंजना गोयल ने रसायन विज्ञान प्रवक्ता अमित शुक्ला को कोचिंग चलाने के आरोप में निलंबित कर दिया है, साथ ही इसकी जांच संयुक्त शिक्षा निदेशक झांसी को सौंप दी है। जिला विद्यालय निरीक्षक रामशंकर ने इसकी सूचना राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य को भेज दी। इस कार्रवाई से जिले के अन्य शिक्षक सतर्क हो गए हैं।
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महज 60 कोचिंग हैं पंजीकृत
जिले में गली- कूचों में कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं, इसमें तमाम संचालकों ने अपने कोचिंग सेंटर का विभाग में पंजीकरण नहीं कराया है। इसके अलावा कुछ सरकारी कर्मचारी, बेसिक शिक्षा विभाग एवं अशासकीय विद्यालयों के कई शिक्षक पर्दे के पीछे कोचिंग सेंटर चला रहे हैं। इस तरह के मकोचिंग सेंटर विभागीय अफसरों की पकड़ से दूर हैं, जिससे उन पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। यही वजह है कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में अभी तक 60 कोचिंग सेंटरों का ही पंजीकरण हो सका है। हालांकि, दो दर्जन कोचिंग सेंटर संचालक पंजीकरण कराने की लाइन में हैं, जिन्हें विभागीय नियमों की कसौटी पर कसा जा रहा है।
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