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घूंघट बनो मास्क, हाथ जोरे की राम-राम, जई परंपरा ने गांवन में कोरोना दओ थाम

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ललितपुर। प्रदेश की 23 करोड़ की आबादी में तीन चौथाई जनसंख्या गांवों में रहती है। ग्राम पंचायतें कोरोना से लड़ रही हैं। यही कारण है कि अब तक जिले में कोरोना का कोई मामला नहीं आया है। बुंदेलखंड की महिलाओं में पर्दा प्रथा काफी प्राचीन है। आज यही घूंघटकी परंपरा सामाजिक मास्क का काम कर रही है। पुरुषों द्वारा भी एक दूसरे को दूर से राम-राम करके सम्मान देने की परंपरा है। यही आचरण इनको संक्रमण से दूर रखे हुए है।
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जनप्रतिनिधि जिसमें अध्यक्ष/सदस्य जिला पंचायत, ब्लाक प्रमुख, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान एवं ग्राम पंचायत सदस्य, निर्वाचित जन प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर रहे हैं। इन्हीं की सक्रिय भागीदारी से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत पूरे प्रदेश को खुले से शौचमुक्त किया गया है तथा यह अभियान अभी भी संचालित है, जिसमें छूटे हुए परिवारों के व्यक्तिगत शौचालय एवं सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किया जा रहा है। कोरोना की लड़ाई एवं लॉकडाउन की स्थिति में पूरे प्रदेश में चार विभाग सीधी लड़ाई लड़ रहे हैं। इसमें चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन राजस्व विभाग और पंचायती राज विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण इसलिए है, क्योंकि यही विभाग प्रदेश की ग्रामीण जनता जो लगभग 65 से 70 प्रतिशत है, से सीधे जुड़ा है। ग्रामीण सफाई कर्मी, जो गांव- गांव में साफ-सफाई, ब्लीचिंग पाउडर छिड़काव कर रहे हैं। सचिव, राशन वितरण, क्वारंटीन सेंटर निर्माण, आश्रय स्थल के माध्यम से निराश्रित को भोजन के साथ- साथ केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा लॉकडाउन की स्थिति में लाभार्थियों का चयन तथा उनको सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवासी मजदूर जो बाहर से आएं है, उनको लेकर ग्राम पंचायतें सजग हैं। बुंदेलखंड में जहां महिलाओं में पर्दा प्रथा/ घूंघट समाजिक मास्क का काम कर रहा है।
14 दिन के लिए क्वारंटाइन
जो लोग बाहर से गांवों में आ रहे हैं, उन्हें 14 दिन के लिए गांव से बाहर (क्वारंटीन) रखा जा रहा है, उनकी निगरानी की जा रही है और स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है। ग्राम पंचायतों द्वारा मुनादी/डुग्गी एवं लाउडस्पीकर द्वारा लॉकडाउन का पालन करने, हाथ धोने, मास्क तथा गमछा बांधने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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बाहर से आए कामगार सबसे बड़ी चिंता
ग्राम पंचायतों की सबसे बड़ी चिंता वह श्रमिक हैं, जो बाहर से आए हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर इनको चिह्नित किया जा रहा है, जो जिस कार्य के लिए सक्षम हैं, उनसे वही कार्य लिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे उद्योगों के माध्यम से इनको समायोजित किया जाएगा।
ग्राम पंचायतें करोना से बेहतर तरीके से लड़ रही हैं। सोशल डिस्टेसिंग का पाठ पढ़ाने, जन सामान्य के सुखदुख में साथ खड़ी हैं। निश्चित है इस लड़ाई में करोना हारेगा पंचायतें जीतेंगी।
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- डा. अवधेश सिंह (पीएचडी)
जिला पंचायत राज अधिकारी
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