पाली (ललितपुर)। कसबा पाली में क्लीनिक और मेडिकल स्टोर संचालक मनमानी कर रहे हैं। स्थिति यह है कि ज्यादातर स्टोरों के संचालक ग्राहकों से दवाओं की मनमानी कीमत वसूलते हैं। जब भी कसबा में स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभियान चलाया जाता है तो यह अपने क्लीनिक व स्टोर बंद करके भाग जाते हैं।
पाली में सरकारी सुविधायुक्त अस्पताल नहीं होने से लोगों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। निजी क्लीनिक व मेडिकल स्टोर संचालक इलाज व दवा के नाम पर खूब चांदी काट रहे हैं। आलम यह है कि ज्यादातर निजी क्लीनिक संचालक इलाज के साथ दवा बेचने के लिए मेडिकल स्टोर का संचालन कर रहे हैं। कई मेडिकल स्टोर का हाल तो यह है कि उस पर बैठने वाले विक्रेता पढ़ाई की उम्र में ही दवाई बेच रहे हैं। इतना ही नहीं कई दवाओं को सुरक्षित रखने के लिए फ्रिज की जरूरत रहती है, लेकिन अधिकांश दुकानों में यह सुविधा नहीं है, इसके बाद भी ये दवाएं बराबर बेची जा रहीं हैं।
कई बार कालातीत दवाएं व इंजेक्शन भी गरीब ग्रामीणों को अपना शिकार बना लेते हैं। जब लोग अपनी परेशानी इन्हें बताते हैं तो वह पीड़ितों को डरा- धमका कर भगा देते हैं। यदि कोई दबंग व्यक्ति सामने आ जाता है तो उसे पैसा ले- देकर मामला सुलटा लेते हैं, जिससे मामला अधिकारियों के पास तक नहीं पहुंच पाता है। मेडिकल स्टोर से उपभोक्ताओं को मान्य बिल की जगह सादा पर्ची थमा दी जाती है। एक रुपए में मिलने वाली दवा की कीमत 5 से 15 रुपए तक वसूली जाती है। परेशान लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को आगे आकर इन मामलों की जांच कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
चिकित्सकों की शिकायत आई है। मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र लिखकर जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- प्रियंका सिंह
एसडीएम