ललितपुर। मानसून के सीजन में होने वाले पौधरोपण का लक्ष्य संशोधित कर दिया गया है। अब जिले में 18 लाख पौधे रोपे जाएंगे। मनरेगा कार्य से होने वाले पौधरोपण से विभागीय कर्मियों की परेशानी बढ़ना तय माना जा रहा है। स्थिति यह है कि गड्ढे की खुदाई के लिए मनरेगा में कार्य करने को मजदूर नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में बढ़े लक्ष्य को पूरा करना विभागीय अफसरों के लिए आसान नहीं होगा।
ललितपुर में पौधरोपण पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। बीते महीनों में प्रदेश सरकार ने एक दिन में एक लाख पौधे रोपने का लक्ष्य रखा था, जिसे आसानी से पूरा कर लिया गया था। इसके मद्देनजर शासन ने एक बार फिर ललितपुर पर ध्यान केंद्रित किया है। आने वाले मानसूनी सीजन में 13,35,000 पौधे रोपने का लक्ष्य रखा था, जिसे संशोधित कर वन विभाग 17.63 लाख पौधे एवं अन्य विभाग का 74,472 पौधे कर दिया गया है। इस तरह जिले में कुल 18.375 लाख पौधे रोपे जाएंगे। इस बात को लेकर विभागीय अफसरों के चेहरों पर तनाव दिखाई दे रहा है।
अफसरों का कहना है कि मनरेगा के तहत गड्ढे खुदाई का कार्य किया जाना है। वर्तमान में धनाभाव के कारण मजदूरों को समय से मजदूरी नहीं मिल पा रही है। कई मजदूरों ने मनरेगा में मजदूरी करने के लिए हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में पुराना लक्ष्य हासिल करने में पसीने छूट रहे थे। नए लक्ष्य को कैसे पूरा किया जाएगा, यह समझ नहीं आ रहा है।
कार्य में बाधा बनी मनरेगा
वन विभाग के पौधरोपण कार्य में मनरेगा बाधा बन गई है, न केवल मजदूर, बल्कि विभागीय कर्मी भी मनरेगा से कार्य नहीं कराना चाहते हैं। इसकी वजह साफ है कि वन कर्मियों को मनरेगा में कार्य कराने के लिए प्रधानों पर निर्भरता बढ़ जाती है, जिसे वन कर्मी अपनी तोहीन समझते हैं। वर्तमान में शासन ने मनरेगा से कार्य कराने के निर्देश देकर वन कर्मियों के हाथ बांध दिए हैं। इससे वन कर्मी अपने आप को असहज महसूस कर रहे हैं।
शासन ने लक्ष्य बढ़ा दिया है। इसकी तैयारियां की जा रही हैं।
वी के जैन
प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानकी