ललितपुर। मंडी शुल्क माफ करने की मांग को लेकर तीन दिन गल्ला मंडी पूर्णतया बंद रही। शनिवार को भी मंडी में कामकाज नहीं हुआ। जिला उद्योग व्यापार मंडल की बैठक में मंडी शुल्क माफ करने की मांग की गई। व्यापारियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजा।
जिलाध्यक्ष सुरेश बडे़रा ने कहा कि भारत सरकार द्वारा मंडी के बाहर मंडी शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिया है। मंडी शुल्क समाप्त होने के बाद गल्ला, दलहन, तिलहन राइस मिलर्स, दाल मिलर्स, आयल मिलर्स, किराना व्यापारी, लकड़ी व्यापारी, बांस विक्रेता, तंबाकू व्यापारी, फल सब्जी के व्यापारी एवं अन्य मंडी से संबंधित व्यापारी जो मंडी के बाहर व्यापार करते हैं, वे पूरी तरह मंडी शुल्क लाइसेंस एवं उसकी सभी कानूनी प्रक्रियाओं से मुक्त हो गए हैं। महामंत्री शैलेंद्र सिंघई ने बताया कि गल्ला मंडी के अंदर प्रदेश सरकार द्वारा दोहरी नीति अपनाई जा रही है। गल्ला मंडी के अंदर के व्यापारियों को व्यापार करने पर शुल्क पूर्णता माफ नहीं किया गया है। इस पर बनवारी लाल कंछल एवं बुंदेलखंड गल्ला व्यापार संघ के अध्यक्ष प्रदीप माहेश्वरी के
आह्वान पर प्रदेश की सभी गल्ला मंडियां तीन दिन के लिए 9, 10, 11 जुलाई को बंद करने का आह्वान किया था। इसके अनुपालन में गल्ला मंडी पूर्ण रूप से बंद रही। उन्होंने मुख्यमंत्री से मंडी के अंदर व्यापार करने वाले व्यापारियों का पूर्ण रूप से मंडी शुल्क माफ करने की मांग की है। इसे लेकर ज्ञापन ई- मेल के माध्यम से और मंडी सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा। ज्ञापन पर प्रदेश मंत्री मनीष सडै़या, वरिष्ठ महामंत्री प्रदीप सतरवांस, शैलेंद्र सिंघई, अभिषेक अनोरा, गल्ला मंडी के पूर्व महामंत्री संतोष इमलिया, संतोष चौबे, नितिन अग्रवाल, उद्योग मंच के प्रदेश मंत्री कमलेश सराफ, बॉबी राजा नाराहट, राजू सिंधी, अजय सोनी, राहुल गुप्ता, नवनीत किलेदार, समित समैया, रामस्वरूप साहू, संदीप खरे, नीलेंद्र जैन, संतोष साहू आदि के हस्ताक्षर हैं।