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मानव के जन्म लेते ही चार व्याधि उत्पन्न हो जाती : कथा व्यास

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संवाद न्यूज एजेंसी
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महरौनी। ब्लॉक महरौनी अंतर्गत ग्राम पंचायत लरगन स्थित मंदिर में श्रीराधा कृष्ण की मूर्तियों की प्राणप्रतिष्ठा पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण का शुभारंभ हुआ।
वृंदावन धाम से पधारीं बाल कथावाचक नंदनी ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मानव जब इस संसार में जन्म लेता है, तो चार व्याधि उत्पन्न होती हैं रोग-शोक, वृद्धापन और मृत्यु, मानव इन्हीं चार व्याधियों से घिरकर इस मायारूपी संसार से विदा लेता है। सांसारिक बंधन में जितना बंधोगे उतना ही पाप के नजदीक पहुंचोगे, इसलिए सांसारिक बंधन से मुक्त होकर ईश्वर की शरण में जाओ, तभी जीवन रूपी नैय्या पार होगी। आज के दौर में परेशानी और अविश्वास बढ़ता जा रहा है, जिससे समाज में खींचतान, स्वार्थ, लोभ, दुख, पतन, विकृतियों का अंबार लगा है। समाज को युग के अनुरूप दिशा, चिंतन, व्यवहार, परमार्थ आदि के लिए हृदय में परिवर्तन आवश्यक है।
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जब मनुष्य में परिवर्तन आ जाता है तो क्रोध नष्ट हो जाता है और क्षमा, दान हृदय में विद्यमान हो जाता है, तब मनुष्य को ईश्वर भी स्वीकारते हैं। अभिमान और सुखी रहने की इच्छा एक प्रक्रिया कहलाती है जिसे न तो कर्तव्य का अभिमान और न ही सुखी रहने की इच्छा रहती है, बल्कि दूसरों को सुखी रखने की इच्छा को लीला कहते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने यही लीला की है, जिससे समस्त गोकुलवासी सुखी और संपन्न थे, माखन चोरी करने का आशय मन की चोरी से है। इस दौरान लरगन प्रधान विशाल सिंह राजपूत ने कथा वाचक का स्वागत किया।
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