ललितपुर। पूर्व सपा जिलाध्यक्ष के घर जान से मारने की नीयत से गोलीबारी करने के मामले में पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह बुंदेला व उनके पुत्र समेत तीन लोगों को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। न्यायालय ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद तीनों आरोपियों को सशर्त जमानत दे दी है। इससे पूर्व न्यायालय ने थाने से तीनों के आपराधिक इतिहास तलब किए थे।
सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने बताया कि 12 वर्ष पूर्व सन 2005 में जिला पंचायत अध्यक्ष पद की चुनाव की रंजिश के चलते समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष जयराम सिंह यादव के चांदमारी स्थित आवास पर जानलेवा हमला करने और फायरिंग की घटना की गई थी। इसमें पूर्व सपा जिलाध्यक्ष की तहरीर के आधार पर वर्ष 2008 में थाना कोतवाली में हमलावरों के खिलाफ विभिन्न आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज हुआ था। फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम हरकेश कुमार की अदालत ने पूर्व सपा जिलाध्यक्ष व उनके परिजनों की मांग के आधार पर पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह बुंदेला, उनके पुत्र पवन राजा बुंदेला व चौकाबाग निवासी वीरु राजा पुत्र निर्भान सिंह को आरोपी बनाते हुए न्यायालय में तलब करने के आदेश जारी किए थे। इस पर तीनों आरोपियों ने उच्च न्यायालय में उक्त तलबी आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी, लेकिन उच्च न्यायालय से उन्हें राहत नहीं मिली थी और 25 मई को तीनों आरोपियों को अपर सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम में समर्पण करने के आदेश दिए थे। इस पर तीनों ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया था और 23 जून को तीनों को उक्त मामले में अंतरिम जमानत दे दी गई थी। इसके साथ ही न्यायालय द्वारा थाना कोतवाली से पूर्व मंत्री समेत तीनों आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड तलब किया गया था। वादी पूर्व सपा जिलाध्यक्ष जयराम सिंह यादव ने तीनों की जमानत के आधार पर आपत्ति जताई थी।
अभियुक्तों के अधिवक्ता मनोहर सिंह ठाकुर ने बताया कि उन्होंने न्यायालय में तर्क रखते हुए यह बताया कि वीरेंद्र सिंह बुंदेला, पवन राजा व वीरु राजा के खिलाफ वादी द्वारा अत्यंत विलंब से प्रथम सूूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। वादी मुकदमा द्वारा अपने अन्य साथियों के साथ 10 नवंबर 2005 को वीरेंद्र सिंह बुंदेला के पुत्र संजू राजा की हत्या कर दी गई थी, इसके संबंध में मामला न्यायालय में विचाराधीन है। उक्त हत्या से बचने के लिए असत्य कथनों के आधार पर अभियोग वादी द्वारा पंजीकृत कराया गया है। गोलीबारी की इस घटना में जिन अभियुक्त के विरुद्घ आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया था, उन सभी अभियुक्तगण की पूर्व में जमानत स्वीकार की जा चुकी है। बृृहस्पतिवार को न्यायालय ने दोनों पक्षों की ओर से सुनवाई के बाद पूर्व मंत्री समेत तीनों लोगों को जमानत दे दी है।
यह है शर्तें
न्यायालय द्वारा जमानत की शर्तों में अभियुक्तगण की ओर से 50 हजार रुपए का व्यक्तिगत बंधपत्र तथा समान धनराशि की दो-दो विश्वसनीय जमानती प्रस्तुत किए जाएं, अंडरटेकिंग दाखिल की जाए कि अभियुक्त प्रत्येक तिथि पर स्वयं या अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होंगे और साक्षी के उपस्थित होने पर कोई स्थगन प्रार्थनापत्र प्रस्तुत नहीं करेंगे, साथ ही वह किसी साक्ष्य के साथ छेड़-छेड़छाड़ नहीं करेंगे और न ही साक्षियों को प्रभावित करेंगे।