आधी आबादी को आगे बढ़ाने के लिए भले केंद्र व राज्य सरकारें तमाम प्रयास करती हो, लेकिन चुनाव के समय महिलाओं को आगे बढ़ाने में सभी राजनीतिक दल पीछे ही दिखे हैं। कम से कम जनपद में तो बड़े राजनीतिक दलों ने महिलाओं को टिकट देने में हमेशा कंजूसी ही बरती है।
66 सालों में जनपद से जनपद की दोनों विधानसभा सीटों पर केवल एक महिला विधायक ही मिलीं है। यह महिला विधायक भी परिस्थिति वश चुनाव में उतरी। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में सदर विधानसभा से बसपा सीट से इंजी नाथूराम कुशवाहा ने जीत दर्ज की थी। वर्ष 2009 में इंजी नाथूराम कुशवाहा की हार्ट अटैक से मौत हो गई। विधायक की मौत के बाद हुए उपचुनाव में बसपा ने नाथूराम कुश्वाहा की पत्नी सुमन कुशवाहा को सीट दी। उपचुनाव में जीत दर्ज सुमन कुशवाहा ने तीन वर्ष तक सदर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया। लेकिन वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने सिटिंग विधायक सुमन कुशवाहा का टिकट काट दिया।
हैरान करने वाली बात है, कि अभी तक सदर विधानसभा सीट पर केवल 6 महिलाओं ने नामांकन ही किया। पहली बार महिला नामाकंन वर्ष 1993 के चुनाव में हुआ था। इस बार दो महिलाओं शांति देवी प्रजापति व राबिया ने चुनाव का पर्चा भरा था। शांति देवी को 189 वोट व राबिया को 224 वोट आए थे। 14 साल बाद वर्ष 2007 में चंपा देवी ने पर्चा भरा, उन्हें 1541 वोट मिले। वर्ष 2012 के चुनाव में मुक्ता सोनी को 10 हजार 766 वोट व सावित्री को 1 हजार 51 वोट मिले। सदर सीट पर तो छह महिलाओं ने नामांकन करने की हिम्मत जुटाईं है, लेकिन महरौनी विधानसभा सीट पर आजादी के बाद से अभी तक एक भी महिला ने नामांकन करने की हिम्मत नहीं जुटा पायी है।
पहली महिला विधायक राजनीति से दूर
जनपद की पहली महिला विधायक बनने का गौरव रखने वाली सुमन कुशवाहा वर्तमान में राजनीतिक परिदृश्य से ओझल है। सिटिंग विधायक होने के बावजूद वर्ष 2012 में बहुजन समाज पार्टी ने उनका टिकट काट दिया था, उसके बाद से उन्होंने राजनीति से दूरी बना ली।
सीट वोटर पुरुष महिला
ललितपुर 4,515,72 2,37,821 2,13,751
महरौनी 4,14,224 2,15,471 1,98,753
महिला साक्षरता दर
वर्ष पुरुष साक्षरता दर महिला साक्षरता दर
2001 63.81 74.98
2011 32.97 50.84