संवाद न्यूज एजेंसी
सिलावन (ललितपुर)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महरौनी में अग्निशामक यंत्र जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच गए हैं। दुर्भाग्यवश यदि आग लग जाए तो काबू पाना काफी मुश्किल हो जाएगा। आग बुझाने में काम आने वाला हौज पाइप पूरी तरह जर्जर स्थिति में है तो स्मॉग सेंसर व सायरन देखरेख के अभाव में खराब पड़े हैं। एनआरसी वार्ड में आग बुझाने के कोई साधन उपलब्ध नहीं हैं।
वर्ष 2020 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महरौनी में अग्निशामक यंत्र, स्मॉग सेंसर व सायरन, एबीसी सिलिंडर, सीओटू सिलिंडर, हौजपाइप, पानी की मोटर लगवाई गई थी। लेकिन, अस्पताल प्रशासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया। अब ये यंत्र जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुंच चुके हैं। एबीसी सिलिंडर व सीओटू सिलिंडर की वैधता एक साल की होती है, लेकिन अस्पताल में अब भी 2020 में भरवाए गए सिलिंडर रखे हुए हैं। इन्हें चार वर्षों से दोबारा नहीं भरवाया गया है।
50 बेड वाले इस अस्पताल के लिए 5000 लीटर की पानी की टंकी रखी गई है, जबकि नियमानुसार 10 हजार लीटर की टंकी होनी चाहिए। इतना ही नहीं एनआरसी (राष्ट्रीय पोषण पुनर्वास केंद्र) वार्ड में आग बुझाने के लिए कोई अग्निशामक यंत्र स्थापित नहीं किए गए हैं।
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सेंसर की देखरेख जरूरी
जानकारों के अनुसार स्मॉग सेंसर जैसे ही धुएं के संपर्क में आता है, वैसे ही सायरन बज उठता है। इसलिए सेंसर की हमेशा देखरेख जरूरी है। इसके अलावा एबीसी और सीओटू (कार्बन डाई आक्साइड) सिलिंडर की वैधता भी एक साल की होती है, इन्हें भी हर वर्ष बदलवाना जरूरी है।
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इनका कहना है-
सीएचसी में दो-तीन दिन में सभी यंत्रों को बदलवा दिया जाएगा। बजट मिलते ही 10 हजार लीटर पानी की टंकी रखवा दी जाएगी। डॉ. सुंदर सिंह, चिकित्साधीक्षक, सीएचसी महरौनी