ललितपुर। दीपावली को नजदीक देख मिलावटखोरों ने सक्रियता दिखानी शुरू कर दी है। दूध, मावा और मिठाइयों की खपत को पूरा करने के लिए मिलावटखोरी कर जमकर मुनाफा कमाया जाता है। जिला प्रशासन व खाद्य विभाग के अधिकारी भी कुछ दुकानों पर सैंपलिंग करते हैं और फिर यह मान लेते हैं कि सब ठीक है।
त्योहारों पर मिठाइयों की डिमांड कई गुना बढ़ जाने के कारण व्यापारियों में प्रतिस्पर्धा भी कई गुना बढ़ जाती है। कुछ व्यापारी ग्राहकों को लुभाने के लिए मिठाइयों में मिलावट करके सस्ते दामों का सहारा लेते हैं। वहीं, कुछ व्यापारी रासायनिक रंगों व सुगंधित पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं जो लोगों को स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक होता है। वहीं मिठाइयों को आकर्षक बनाने के लिए कुछ व्यापारी चांदी की बर्क का इस्तेमाल करते हैं। जबकि मिठाइयों में चांदी की बर्क के इस्तेमाल पर रोक लगी हुई है। बर्क बनाने में एल्यूमीनियम का इस्तेमाल भी होता है जो कि स्वास्थ्य के लिए अत्यन्त हानिकारक है।
बिक रहा मिलावटी खुला तेल
बाजारों में बड़े पैमाने पर मिलावटी खाद्य तेल बेचा जा रहा है। कई बड़े व्यापारी इस मिलावटी खुले तेल का शुद्धीकरण किए बगैर ही फर्जी या नकली ब्रांड वाली बोतलों व टीनों में भरकर बेच रहे हैं। इस मिलावटी खाद्य तेल का इस्तेमाल करने से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।
मिलावट का स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव
मिलावटी खाद्य पदार्थ खाने से अंधापन, लकवा, लीवर में गड़बड़ी तथा ट्यूमर जैसी खतरनाक समस्याएं हो सकती हैं। मसाले में मिट्टी, लकड़ी का बुरादा मिला दिया जाता है। यह आहार तंत्र के रोग, दांत व आंत को प्रभावित करता है। सरसों के तेल में आर्जिमोन तेल, एपिडमिक ड्रॉफ्सी मिला दिया जाता जो आहार तंत्र को क्षति पहुंचाता है। बेसन व हल्दी में पीला रंग, मैटानिल मिलाया जाता है यह प्रजनन तंत्र, पाचन तंत्र, यकृत व गुर्दे को प्रभावित करता है। लाल मिर्च में रोडामाइन मिलाया जाता है यह यकृत, गुर्दे को हानि पहुंचता है। चांदी बर्क में एल्यूमीनियम मिला दिया जाता है इससे पेट संबंधित बीमारी होती है। दूध में पानी, यूरिया व वाशिंग पाउडर मिलाया जाता है। इससे कई तरह की बीमारियां होती हैं। घी में चर्बी मिलाई जाती है इससे हार्ट संबंधी बीमारी होती है।
ऐसे करें मिलावट की पहचान
दूध में टिन्चर आयोडीन की कुछ बूंदे डालिये। जैसे ही दूध का रंग गहरा नीला या काला हो जाये तो समझिये दूध में मिलावट है, जबकि शुद्ध दूध का रंग कॉफी जैसा होगा। डालडा की जांच के लिए परखनली में थोड़ा डालडा लेकर उसमें कपड़े धोने का सोडा मिलाएं। यदि झाग निकले तो समझें कि यह सस्ते तेल का मिश्रण है। पिसी लाल मिर्च के लिए एक गिलास पानी में चम्मच भर पिसी लाल मिर्च डालें। लाल मिर्च पानी के ऊपर रहेगी। जबकि मिलावटी तल में बैठ जायेगी। मिठाई को हाथ में लेने के बाद अगर उसका रंग हाथ पर लग रहा है तो नकली है। मावे को उंगलियों के बीच मसलें, अगर यह दानेदार लगता है तो मिलावटी है। खोये पर आयोडीन की दो से तीन बूंदें डालिए. अगर यह काला पड़ जाए तो इसका मतलब है कि यह मिलावटी है। वहीं सरसों व अन्य खाद्य तेल को फ्रिज में रखें यदि जम जाता है तो मिलावटी है। चांदी के बर्क की जांच के लिए शुद्ध बर्क जलाने से उतने ही वजन की छोटी-सी गेंद बन जाता है. लेकिन मिलावटी बर्क स्लेटी रंग का जला हुआ कागज बन जाता है।
त्योहार के बाद आएगी रिपोर्ट
अभी तक स्थानीय खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बाजारों में खाद्य पदार्थों व सामग्री की सैंपलिंग शुरू नहीं की है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मंगलवार से अभियान चलाया जाएगा। सैंपलिंग की रिपोर्ट आने में कम से कम दस दिन तो लगेंगे ही। ऐसे में लोगों को अपने स्वास्थ्य के लिए स्वयं ही सावधानी बरतनी होगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद विभाग मिलावटखोरों पर जुर्माना तो लगा देगा, लेकिन तब तक मिलावटखोर मोटी रकम कमा चुके होंगे।
मंगलवार से बाजार में बिकने वाली खुली खाद्य सामग्री का नमूना लिया जाएगा, जिसमें त्योहार को देखते हुए मिठाइयों, मावा व खुले खाद्य तेल को प्रमुखता दी जाएगी।
सूर्यलाल बिंद
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी