फसलें सूखतीं हैं तो सूखें, पानी तो दिसंबर में मिलेगा
महरौनी। जामनी बांध से निकली दाईं टीकमगढ़ राजबाहा नहर में पानी नहीं छोड़ा गया है। इससे किसानों को फसल की सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है। इसके लिए उनको तारीख तीन दिसंबर तक इंतजार करना पड़ेगा। इसकी वजह किसानों को निजी संस्थानों से फसलों की सिंचाई करनी पड़ रही है।
इस बार बारिश अच्छी होने से किसानों को उम्मीद थी फसलों की सिंचाई के लिए पानी की कमी नहीं होगी। इस बार बांध में लबालब पानी है। अतिवृष्टि से पहले फसल चौपट हो चुकी है। उनके पास पैसे नहीं हैं कि डीजल खरीदें। इसके बाद भी पानी न मिलने पर उनको किसी तरह पैसों का इंतजाम कर सिंचाई कर रहे हैं। किसानों ने चना, मटर, मसूर आदि की बुवाई कर दी है और अब फसल सिंचाईं मांग रही है।
टीकमगढ़ राजबाहा नहर पर तहसील के अंतर्गत मौजा कुम्हैड़ी, असौरा, बम्हौरी बहादुर सिंह, जखौरा, अगौरा व पाली मौजा की हजारों एकड़ जमीन पर बोई फसल की सिंचाई होती है। किसानों ने जैसे-तैसे फसल की बुवाई कर ली। फसल बोए लगभग 20 से 26 दिन हो चुके हैं लेकिन, टीकमगढ़ राजबाहा को नहीं खोला जा रहा है। रोस्टर के अनुसार नहर में पानी तीन दिसंबर के बाद छोड़ा जाएगा। तब तक फसल लगभग 40 दिन की हो जाएगी और तब तक फसल सूखने की भी आशंका है। जो पौधे जीवित रहेंगे, उसमें फूल आ जाएगा। सिंचाई के अभाव में फसल पूर्ण विकास नहीं कर पाएगी। इसका असर पैदावार पर पड़ेगा, क्योंकि फूल आने पर की गई सिंचाई का लाभ फसल को नहीं मिल पाएगा। नहर से पानी मिलने की संभावना किसानों को नहीं दिखाई दे रही है, इस कारण किसानों को फसलों की सिंचाई करने की चिंता सताने लगी है ।
नहर को दो भागों में बांटा गया
जामनी बांध से निकली दाईं जामनी नहर को 25.400 किलोमीटर पर दो भागो में बांट दिया गया है। उन्हें टीकमगढ़ राजबाहा और महरौनी राजबाहा नाम दिया गया है। नहर से लगभग 10 किलोमीटर तक तहसील क्षेत्र के किसानों की जमीनें लगी हुई हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश के जिला टीकमगढ़ को पानी पहुंचता है। 12 नवंबर से महरौनी राजबाहा नहर चलायी जा रही है, लेकिन रखरखाव के अभाव में पानी का रिसाव हो रहा है, इस कारण पानी बेकार हो रहा है। टीकमगढ़ राजवाहा से जुड़े किसान पानी के लिए परेशान हैं।
नहर के इंतजार में रहेंगे तो गेहूं की बुवाई का भी समय निकल जाएगा। लागत बहुत आ रही है क्योंकि, लगभग एक किलोमीटर दूर से खेत पर पानी लगा रहे हैं। दो डीजल पंप रखे हैं, तब जाकर खेत को पानी दे पा रहे हैं।
रामस्वरूप निरंजन, किसान ग्राम कुम्हैड़ी
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मौजा कुम्हेड़ी में खेत ठेका पर लिया है। नहर तीन दिसंबर को खोली जाएगी। तब तक गेहूं की बुवाई का समय निकल जाएगा, इसलिए बोरिंग पर पंप सेट रखकर डीजल जलाकर खेत की सिंचाई कर रहे हैं। पंपसेट से सिंचाई बहुत मंहगी पड़ रही है। पुष्पेंद्र सिंह, किसान ग्राम क्योलारी
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उड़द की फसल सड़ गई थी, अब कर्ज लेकर चना, मटर और मसूर की बुवाई करे 22 दिन हो चुके हैं। फसल अभी अच्छी है और सिंचाई करने का समय चल रहा है। अगर छह-सात दिन में पानी नहीं मिलेगा तो फसल सूख जाएगी।
शिवू कुशवाहा, किसान ग्राम जखौरा
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हम तीन भाइयों के पास छह एकड़ जमीन है। सभी ने फसल बो दी है, जिसमें दो खेत में मसूर, एक खेत में चना और एक खेत में गेहूं है। फसल बोए 22 दिन हो चुके हैं और फसल सिंचाई मांग रही है। नहर बंद है कैसे सिंचाई करें।
हल्कू अहिरवार, किसान ग्राम जखौरा
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तीन दिसंबर तक तो फसल की सिंचाई का समय और गेहूं की बुवाई का समय निकल जाएगा। महरौनी राजवाहा के साथ टीकमगढ़ राजवाहा नहर को साथ-साथ पानी दिया जाए तो किसान बर्बाद होने से बच जाएगा। सुम्मेर सिंह, ग्राम प्रधान, बम्हौरी बहादुर सिंह
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जैसा रोस्टर बनता आया है वैसा ही बनाया गया है। इसमें कोई फेरबदल नहीं कर सकते हैं। उच्च अधिकारी चाहें तो फेरबदल कर सकते हैं।
एसपी नरौरिया, अधिशासी अभियंता