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सब्जी किसानों को दस करोड़ का नुकसान

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खेत में लगी टमाटर की फसल से टमाटर तोड़ता किसान - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। लॉकडाउन की वजह से सीमाओं को सील कर दिया गया है। आवागमन पूरी तरह से ठप है। इससे सब्जी पैदा करने वाले किसानों का बुरा हाल है। उनकी सब्जी की उपज जिले में बहुत सस्ती कीमत में बिक रही है। इससे सब्जी की खेती करने वाले किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। गर्मी में फसल की कीमत अच्छी मिलती है, लेकिन इस बार लाकडाउन के कारण जिले में किसानों को लगभग दस करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
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तहसील ललितपुर के अंतर्गत ग्राम रजवारा, पनारी, बिरारी, कचनोंदा, मैलवारा, मसौरा, जिजयावन सहित कई गांवों में किसान सब्जी की खेती करते हैं। लौकी, टमाटर, तरोई, गोभी, ककड़ी, टिंडा आदि की पैदावार करते हैं। यह सब्जी झांसी, मध्यप्रदेश के सागर, टीकमगढ़, विदिशा, इंदौर जिलों की मंडी में जाती थी, क्योंकि इन जिलों के सब्जी कारोबारी स्वयं आकर यहीं से सब्जी ले जाते थे। इससे किसानों को यह फायदा होता था कि उन्हें भाड़ा खर्च नहीं करना पड़ता था, मंडी के भी चक्कर नहीं लगाने पड़ते थे और कारोबारी घर बैठे सब्जी ले जाते थे।
लेकिन, लॉकडाउन हो जाने की वजह से सीमाओं पर आवागमन ठप है और सब्जी जिले से बाहर नहीं जा पा रही है। यही कारण है कि किसानों को सब्जी माटी मोल बेचनी पड़ रही है, जो टमाटर मंडी में थोक के रेट में गर्मियों में बीस से 25 रुपये प्रति किलोग्राम बिकता था, अब वह एक रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बिक रहा है। खेती करने वाले किसान डेढ़ सौ एकड़ से अधिक जमीन में सब्जी उगाते हैं। इसमें एक करोड़ रुपये के आसपास खर्च होता है, क्योंकि बीज अस्सी हजार रुपये प्रति किलोग्राम मिलता है। क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सब्जियां पैदा होती है, जो ललितपुर सब्जी मंडी सहित मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में बेची जाती हैं। मौसम के अनुसार कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करने में भी किसानों का बहुत पैसा खर्च होता है। जिले में टमाटर की उपज सबसे अधिक होती, यही कारण है कि सौ एकड़ जमीन में टमाटर पैदा होता है, अन्य पचास एकड़ में तरोई, मूली, धनिया, लौकी, ककड़ी और रौंसा की फली पैदा होती है। टमाटर एक एकड़ में पैदा करने के लिए पचास हजार रुपये की लागत आती है। जबकि, फसल बिकने पर करीब डेढ़ से पौने दो लाख रुपये की आमदनी हो जाती है।
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ग्राम रजवारा में पिछले दस साल से बंटाई से खेती करते चले आ रहे गांव के रज्जूलाल कुशवाहा का कहना है कि लॉक डाउन की वजह से पूरा कारोबार चौपट हो गया। लागत निकालने में भी परेशानी आ रही है। सब्जी की उचित कीमत नहीं मिलने से किसान बर्बाद हो रहा है। खेतों के आसपास घूम रहे छुट्टा जानवरों से खेतों की रखवाली करने में ही सर्वाधिक परेशानी हो रही है।
सब्जी का मुख्य केंद्र है बिरारी
तहसील के अंतर्गत ग्राम बिरारी में सब्जी उपज का प्रशिक्षण केंद्र है। यहां आसपास के गांवों के किसान सब्जी पैदा करने में रुचि लेते हैं। लेकिन, कोरोना के कारण किसानों का सब कुछ बर्बाद हो गया है।
हमारे खेतों में कई वर्षों से किसान बंटाई पर खेती करते हैं। हम उन्हें पूरी लागत देते हैं। फसल को बाजार में बेचकर लागत काटकर उत्पादन आधा-आधा कर लेते हैं। इस बार लॉकडाउन से किसान की मेहनत और लागत भी नहीं निकली है।
- राव यादवेंद्र सिंह बुंदेला
इस वर्ष एक एकड़ में गोभी और टमाटर की फसल बोई थी। 800 रुपये का 10 ग्राम टमाटर बीज खरीदा था। बाजार में कोई कीमत नहीं मिलने से खेत को उजाड़ दिया है।
- रामसेवक राय
पिछले साल की तरह इस साल भी मैंने ककड़ी, टिंडा और धनिया की खेती की है। लेकिन, लॉकडाउन की वजह से बाजार जाने की हिम्मत नहीं होती है। सब्जी में इस बार भारी नुकसान हुआ है।
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- तोरन कुशवाहा
डेढ़ एकड़ में लौकी और तरोई की फसल बोई थी। फसल तैयार है, लेकिन लाकडाउन नहीं खुलने के कारण बाजार नहीं मिल पा रहा है। इसलिए फसल में नुकसान है।
- रामगोपाल राय
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