फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किसान जेवर गिरवी रखने को मजबूर

Tue, 22 Nov 2016 01:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
farmer, lalitpur news - फोटो : demo
विज्ञापन
मड़ावरा (ललितपुर)। 
विज्ञापन

पिछले तीन वर्षों से सूखा, अतिवृष्टि जैसी आपदाओं से जूझ रहे किसानों को रबी की फसल बुवाई के लिए कठिन हालातों से जूझना पड़ रहा है। खेती के लिए रुपये नहीं होने के कारण किसानों को अपने जेवर तक गिरवी रखने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। जिन किसानों के पास जेवर या कोई और संपत्ति नहीं है, वे परेशान घूम रहे हैं। नोटबंदी के कारण किसान क्रेडिट कार्ड भी मददगार साबित नहीं हो पा रहे हैं। नतीजतन बुवाई नहीं होने से कई किसानों के खेत खाली पड़े हुए हैं।  

मड़ावरा क्षेत्र में लगातार तीन साल से फसल नुकसान होने के कारण किसान बर्बादी के कगार पर आ गए हैं। नोटबंदी का फैसला होने के बाद तो ग्रामीणों का सहारा किसान क्रेडिट कार्ड भी काम नहीं आ रहा है। सरकार ने भले ही किसानों को 25 हजार रुपये की रकम देने की घोषणा कर दी हो, लेकिन बैंकों में रुपये नहीं होने के कारण किसानों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 
विज्ञापन

   जनपद के छोर पर बसे ग्राम लखंजर के निवासी नन्हेंलाल यादव का कहना है कि उनका किसान क्रेडिट कार्ड सर्व यूपी ग्रामीण बैंक सौंरई से बना हुआ है, लेकिन बैंक जाते हैं तो धनराशि नहीं दी जा रही है। नन्हें के गांव से बैँक की दूरी लगभग बीस किलोमीटर है। ऐसे में एक दिन अगर वह बैंक जाते हैं, तो उस दिन न तो खेती पर ध्यान दे सकते और न ही मजदूरी पर। पूरा दिन बैंक में गुजर जाता है और हाथ कुछ आता नहीं है। वह कहते हैं कि ऐसे हालातों में घर में रखे जेवरात गिरवी रख दिए हैं। इन पैसों से डीजल एवं खाद बीज की व्यवस्था हो पाई है। 


नहीं मिल रहे रुपये 
पांच सौ एवं एक हजार के नोट बंद होने के बाद किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लगभग एक दर्जन से ज्यादा वनांचल के गांव सर्व यूपी ग्रामीण बैंक सौंरईं से जुड़े हुए हैं, लेकिन दस दिन बीतने के बाद भी बैंकों में रुपये उपलब्ध न होने के कारण किसान परेशान हैं। बैंक से केसीसी का पैसा नहीं मिल पा रहा है। पीएम ने किसानों को रुपये देने की सीमा भी तय कर दी है, लेकिन बैंकों पर इसका कोई असर नहीं है।

पानी का नहीं है इंतजाम
जनपद का भले ही प्रदेश में सबसे ज्यादा बांध होने का रिकार्ड हो, लेकिन कई गांवों के किसान अभी भी पानी के लिए परेशान हैं। रबी की बुवाई के लिए जिन स्थानों पर पानी की उपलब्धता है वहां पर तो किसानों ने फसल बो दी है, किंतु जहां पानी नहीं है उनके खेत खाली पडे़ हैं। यह किसान अभी भी पानी के इंतजार में हैं। धवा गांव के किसान मोहन ने बताया कि पिछले वर्ष उर्द एवं रबी की फसल में कुछ नहीं हुआ था। बारिश न होने से पानी नहीं मिला जिससे पूरी फसल चौपट हो गई। मजदूरी करके परिवार का गुजारा हुआ। इस बार भी सिंचाई के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं होने से फसल बचाना मुश्किल हो रहा है। 
 किसान लखन का कहना है कि कड़ी  मेहनत के साथ खेत में रबी की फसल बोई है किंतु पानी की व्यवस्था नहीं है। खेत तक यदि पानी लाना है तो  बहुत दूर तक पाइप लाइन डालनी पडे़गी. जिसमें  खर्चा बहुत ज्यादा आएगा। यदि पानी मिल गया तो फसल होगी, नहीं तो खेत सूख जाएगा। 


खाली पड़े खेत
ग्राम लखंजर निवासी मिही लाल बताते हैँ कि उनके पास रुपयों की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। किसान क्रेडिट कार्ड से रुपया निकल नहीं पा रहा है। उनके खेत बिना बुवाई के पड़े हैं, जबकि आसपास के खेतों में फसल आने लगी है। वह कहते हैँ कि उनके क्षेत्र में पहले से ही सिंचाई के संसाधनों की कमी है, ऊपर से नोटबंदी के कारण किसान परेशान हो गए हैं। जल्द ही हालात न सुधरे तो इस बार किसान दैवी आपदा से नहीं बल्कि सरकार की थोपी आपदा से बर्बाद हो सकता है।
विज्ञापन



खेती करें या बैंक में लाइन लगाएं
 दलपतपुर  निवासी जयराम अहिरवार ने बताया कि  प्रधानमंत्री द्वारा नोटबंदी से बहुत परेशानी हो रही है। सिंचाई  के लिए डीजल, खाद, बीज लेने को परेशान हैं। किसान दिनभर बैंक की लाइन में लगें या फिर खेत में पानी दें। कुल मिलाकर किसानों के लिए नोटबंदी आफत बनकर आई है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें