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Lalitpur News: ओलावृष्टि और बारिश से बर्बाद फसलों का किसानों ने मांगा मुआवजा

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संवाद न्यूज एजेंसी
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तालबेहट। एक और दो मार्च को हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से तबाह फसलों के मुआवजा के लिए साेमवार को किसानों ने तहसील में अधिकारियों को ज्ञापन दिया।
भारतीय किसान यूनियन, जन अधिकार पार्टी और पूराकलां पूराविरधा क्षेत्र से आए किसानों ने तहसीलदार चंद्रकांत तिवारी एवं नायब तहसीलदार घनेंद्र कुमार को दिए ज्ञापनों के माध्यम से अवगत कराया कि 28 फरवरी को आंधी-तूफान व बारिश से खेतों में खड़ी फसलें गिर गई थीं। एक और दो मार्च को तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि और बारिश से गेहूं, चना, सरसों, मटर की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं। पूराकलां, बार, तालबेहट, कडेसराकलां, शाहपुर, बिजरौठा, म्याव, मुकटौरा, रजावन, करीला, थानागांव, बनगुवाकलां, बिगारी, पवा, पूराकलां, पूराविरधा, हंसारकलां, हंसारी खुर्द, कन्धारी कलां, नत्थीखेड़ा, उगरपुर समेत अधिकांश ग्रामों में फसलें चालीस से सत्तर प्रतिशत बर्बाद हो गई हैं। किसान पांच वर्षों से अतिवृष्टि, ओलावृष्टि से तबाह हो चुके हैं। बीमा कंपनी के अधिकारी फसलों का बीमा डकार जाते हैं। किसानों को उनकी नुकसान फसलों का मुआवजा नहीं मिलता। लगातार फसलों के होते नुकसान से किसानों की आर्थिक स्थिति बदतर हो रही है। ज्ञापन देने वालों में अनिल अड़जरिया, कीरत सिंह, सूर्यप्रताप सिंह, भवानी सिंह, धरमन कुशवाहा, मानसिंह यादव सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे। तहसीलदार चंद्रकात तिवारी ने समस्त राजस्व कर्मचारियों को अतिवृष्टि में फसलों को हुए नुकसान की रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।

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72 घंटे से बंद है टोल फ्री नंबर
बर्बाद फसलों की जानकारी देने के लिए किसानों को टोल फ्री नंबर 18008896868 व आपदा प्रबंधन नंबर 1077 दिया गया था। क्षेत्र के किसान बाबूलाल नरवरिया ने आरोप लगाया कि अतिवृष्टि के 72 घंटे बाद भी ये नंबर बंद हैं और प्रधानमंत्री बीमा सुविधा केंद्र पर ताले लटके हैं।
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प्रभावित फसलों का तत्काल मुआवजा दिलाने की मांग
ललितपुर। कंपनी बाग में बुंदेलखंड विकास सेना की एक बैठक संगठन प्रमुख हरीश कपूर टीटू की अध्यक्षता में हुई, जिसमें ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों पर चिंता व्यक्त करते हुए तत्काल मुआवजा दिए जाने की मांग की गई।
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संगठन प्रमुख ने कहा कि प्राकृतिक आपदा से गेहूं, मटर एवं मसूर आदि फसल को भारी नुकसान हुआ है। फसलें जमीन पर बिछ गई हैं। सदर तहसील के हरपुरा, झरकौन, रघुनाथपुरा व रजवारा आदि गांवों में अधिक नुकसान हुआ है। इस दौरान राजमल बरया, फूलचंद रजक, राजकुमार कुशवाहा, नंदराम कुशवाहा, पुष्पेंद्र सिंह बुंदेला आदि कई गांवों के किसान मौजूद रहे। संवाद
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