ललितपुर। चकबंदी में लगे गांवों की समस्या हल होने का नाम नहीं ले रही है। चार दशक से चकबंदी प्रक्रिया चल रही है, लेकिन 77 गांवों में अभी भी यह अधूरी है। इन गांवों से पांच से छह शिकायतें प्रतिदिन जिला मुख्यालय पर आती हैं। जनवरी से अब तक 932 शिकायतें आ चुकी हैं, जिसमें 45 लंबित हैं। वहीं, 493 वाद चकबंदी विभाग के लंबित चल रहे हैं।
जिले में 1985 से चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। कुल 747 गांव हैं, जिसमें से 273 को चकबंदी प्रक्रिया में शामिल किया गया था। 196 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया प्रारंभ की तो 77 गांव ऐसे हैं, जिसमें अभी तक प्रक्रिया चल रही है। दो गांव ऐसे हैं, जिनमें पिछले 38 साल से प्रक्रिया चल रही है। अब विभाग कुछ गांव में प्रक्रिया पूर्ण करने का दावा कर रहा है। लेकिन, चकबंदी विभाग में फैला भ्रष्टाचार व लापरवाही के कारण लोग विभागों के चक्कर लगाते नजर आते हैं। दो दिन पहले चकबंदी प्रक्रिया से परेशान होकर एक महिला ने आत्महत्या तक कर ली थी।
जानकारों का कहना है कि किसी का उड़ान चक बना दिया जाता है तो किसी को चक दे दिया जाता है, लेकिन चकरोड नहीं दी जाती। इससे विवाद होता है, कब्जा दखल कराने में भी लंबा खेल होता है। जनवरी में 1059 वाद नए व 887 वाद पुराने लंबित थे। लगातार सुनवाई के बाद 1453 वादों का निस्तारण किया गया। वहीं, जनवरी से अब तक चकबंदी संबंधी शिकायतें ऑनलाइन 800 व ऑफलाइन 132 दर्ज की गईं, जिसमें से 45 शिकायतें अभी लंबित हैं। सूत्रों का कहना है कि चकबंदी संबंधी कुछ शिकायतों का निस्तारण विशेष श्रेणी में रखकर कर दिया गया। लेकिन, जिलाधिकारी ने इस पर रोक लगा दी है।
चकबंदी का विवरण
तहसील - ग्रामों की संख्या - चकबंदी पूर्ण ग्राम - प्रक्रियाधीन ग्राम - चकबंदी से वंचित ग्राम
महरौनी - 146 - 112 - 09 - 25
मड़ावरा - 133 - 64 - 03 - 66
तालबेहट - 169 - 00 - 00 - 169
ललितपुर - 203 - 01 - 58 - 144
पाली - 106 - 19 - 07 - 80
योग - 747 - 196 - 77 - 484
वर्जन
चकबंदी संबंधी जो भी शिकायतें आती हैं, उनका निस्तारण मौके पर जाकर कर दिया जाता है। न्यायालय में लंबित वाद भी निस्तारित किए जा रहे हैं।-राकेश कुमार, जिला बंदोबस्त अधिकारी।