जाखलौन। कस्बे की सहकारी समिति में किसानों का गेहूं खरीदने के लिए दो खरीद केंद्र शुरू किए हैं। लेकिन, यह केंद्र किसानों के लिए सहयोगी कम, समस्या अधिक बन गए हैं। यहां एक दिन में लगभग 300 क्विंटल गेहूं खरीदने की क्षमता है, लेकिन प्रतिदिन छह सौ क्विंटल गेहूं के टोकन जारी किए जा रहे हैं। इससे जिन किसानों का गेहूं नहीं बिक पा रहा है, वह परेशान हैं।
कस्बे में किसान सेवा सहकारी समिति द्वारा दो गेहूं खरीद केंद्र नवीन मंडी परिसर में संचालित हैं। खरीद में पारदर्शिता लाने के लिए किसानों को ऑनलाइन टोकन की व्यवस्था प्रारंभ की गई है। व्यवस्था के तहत किसान को सीएससी (जनसेवा केंद्र) पर अपना पंजीयन कराना होता है। पंजीयन के लिए खसरा, खतौनी की नकल, बैंक की पासबुक जैसे जरूरी कागजात दिखाकर किसान अपना टोकन नंबर प्राप्त करते हैं। टोकन में गेहूं बेचने की तिथि निर्धारित कर दी जाती है। किसान टोकन के अनुसार निर्धारित तिथि को अपना गेहूं बेचने ले जाता है, लेकिन वहां पर उसका नंबर नहीं लग पाता है, क्योंकि वहां पर क्षमता से अधिक टोकन पहले से जारी हो चुके होते हैं। ऐसे में उनका गेहूं कई-कई दिन तक नहीं बिक पाता है।
कस्बा के दोनों गेहूं खरीद केंद्रों पर 80-80 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया है। इसके सापेक्ष अब तक केंद्र एक पर 2356 क्विंटल और केंद्र दो पर 1900 क्विंटल गेहूं की खरीद हो चुकी है। लेकिन, गेहूं की उठान नहीं होने के कारण गोदाम में जगह भर चुकी है। अब तक क्रय केंद्र एक से पांच सौ क्विंटल और क्रय केंद्र दो से छह सौ क्विंटल गेहूं का उठान किया गया है। अब, जब तक गोदाम खाली नहीं होता और बारदाना नहीं आ जाता, तब तक खरीद हो पाना संभव नहीं है।
पिछले वर्ष सहकारी समिति में तीन गेहूं खरीद केंद्र खोले थे, जिनका लगभग चार लाख रुपया बकाया है। पीसीएफ द्वारा अब तक भुगतान नहीं किया गया है। पिछले वर्ष परिवहन में 15 प्रति क्विंटल अतिरिक्त धनराशि देने पर ही गोदाम से उठान हुआ था। यह पैसा सचिवों ने अपनी जेब से दिया था, जो आज तक वापस नहीं मिला।
अशोक पटेल, सचिव, जाखलौन सहकारी समिति
सिस्टम में कहीं पर खराबी है। टोकन की समस्या आ रही है। क्षमता से अधिक किसानों को टोकन जारी हो रहे हैं। इस बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है, लेकिन अभी कोई समाधान नहीं निकला है। अभी उन्हें 38 क्रय केंद्रों पर 190 के सापेक्ष कुल 100 गांठें बारदाना की प्राप्त हुई हैं। जिन लोगों का पहले नामांकन हुआ है, पहले उनका गेहूं खरीदा जाएगा।
रमेश कुमार गुप्ता, सहायक निबंधक सहकारिता