अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। मौनी अमावस्या पर महाकुंभ में स्नान के लिए यहां से ट्रेन व अन्य वाहनों से हजारों श्रद्धालु प्रयागराज गए, लेकिन वहां भगदड़ की सूचना पर परिजन परेशान हो गए। कई श्रद्धालुओं के मोबाइल बंद आने या बात नहीं होने के कारण लोग परेशान रहे। यहां के कुछ श्रद्धालुओं ने मोबाइल पर अमर उजाला से बातचीत में बताया कि वाहनों को 60 किमी पहले रोक दिया गया। कभी पैदल तो कभी ई रिक्शा व बाइक से छह से आठ घंटे बाद संगम तट पर पहुंचे। स्नान का सौभाग्य मिला तो थकान दूर हो गई।
मौनी अमावस्या का सनातन धर्म में काफी महत्व है। श्रद्धालु नदियों में स्नानादि कर पूजन अर्चन करते हैं। इस दिन के लिए हर वर्ष श्रद्धालु चित्रकूट जाते हैं और नदी में स्नान के बाद वहां कामदगिरी पर्वत की परिक्रमा भी करते हैं। लेकिन, इस बार महाकुंभ में स्नान करने का सौभाग्य भी श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। बुधवार सुबह वहां भगदड़ की सूचना मिलने पर महाकुंभ में गए श्रद्धालुओं के परिजन चिंतित हो गए। मोबाइल से संपर्क किया।
कुछ लोगों का परिजनों से संपर्क नहीं हो सका या फोन नहीं उठा। बाद में लोगों का अपने परिजनों से संपर्क होने पर वह चिंतामुक्त हो गए। अधिकांश लोगों ने बताया कि वह संगम पहुंच गए हैं और स्नान भी कर लिया है। कई लोगों ने तो वीडियो कॉल हुए संगम के दर्शन भी कराए।
बिजली विभाग के खंड द्वितीय कार्यालय में तैनात अंकित नायक ने बताया कि वह अपने साथियों के साथ महाकुंभ में संगम पर स्नान करने के लिए एक दिन पहले ही पहुंच गए थे। संगम के पास ही रुक गए। बुधवार सुबह ही संगम तट पर पवित्र स्नान किया। उन्होंने कहा कि पहली बार कुंभ में स्नान कर मन बहुत प्रसन्न है। उनकी गाड़ी 20 किमी पहले खड़ी करवा दी गई, जिससे पैदल यात्रा की, लेकिन संगम में स्नान से परेशानी भूल गए।
मोहल्ला रामनगर निवासी धर्मेंद्र राठौर ने बताया कि वह परिवार के साथ महाकुंभ में पहुंचे हैं। उनकी बस पचास किलोमीटर दूर खड़ी कर दी गई, लेकिन वह पूरे परिवार और छोटे बच्चाें के साथ पैदल ही संगम तक पहुंच गए और स्नान किया।