पुलिस वर्ष 2022 में स्वास्थ्य विभाग में भर्ती के दौरान प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की जांच करने वाली टीम से भी पूछताछ करेगी। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों का विवरण खंगाला जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज में कूटरचित शैक्षिक व चिकित्सकीय डिग्रियां लगाकर तीन वर्षों तक कार्डियोलॉजिस्ट के पद पर कार्य करने वाले आरोपी अभिनव सिंह के मामले में पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। अब वर्ष 2022 में स्वास्थ्य विभाग में भर्ती के दौरान प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की जांच करने वाली टीम से भी पुलिस पूछताछ करेगी। इसके लिए पुलिस ने तैयारी शुरू कर दी है।
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जांच में जुटी पुलिस
पुलिस अब एनएचएम के तहत स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में कार्डियोलॉजी विभाग की पूरी भर्ती प्रक्रिया को जांच के दायरे में लेने की तैयारी कर रही है। इस दौरान अभिलेखों की जांच करने वाली समिति में शामिल अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी। पुलिस टीम समिति में शामिल अधिकारियों का विवरण जुटाने में लगी हुई है।
16 माह रहा जेल में
पुलिस जांच में सामने आया है कि अभिनव सिंह के खिलाफ वर्ष 1999 में कस्टम विभाग द्वारा भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लंबे समय तक फरार रहा और अमेरिका में रह रहे अपने बहनोई डॉ. राजीव गुप्ता की शैक्षिक व चिकित्सकीय डिग्रियों की कूटरचना कर मथुरा के एक मेडिकल कॉलेज में नौकरी करता रहा। वर्ष 2019 में सीबीआई ने उसे मथुरा से गिरफ्तार कर जेल भेजा था। न्यायालय से 16 माह की सजा और आठ लाख रुपये अर्थदंड भुगतने के बाद वह जुलाई 2020 में जेल से रिहा हुआ था।
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जीजा के प्रपत्र पर फोटो लगाकर बन गया स्पेशलिस्ट
जेल से रिहा होने के बाद एनएचएम के तहत जिले के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में कार्डियोलॉजी विभाग में संविदा भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई। इसमें अभिनव सिंह ने अपनी बहन के पति डॉ. राजीव गुप्ता के प्रपत्रों का इस्तेमाल करते हुए अपनी फोटो और पहचान पत्र लगाकर आवेदन किया। चयन के बाद उसे सीसीयू यूनिट जिला अस्पताल में स्पेशलिस्ट के पद पर नियुक्ति मिल गई। अब इसकी जांच होगी।