गरीबों का पेट भर रही सामुदायिक रसोई
मनोज वैद्य
ललितपुर। सूखे में रोजी-रोटी खो चुके कामगारों, असहायों और निर्धन परिवारों के लिए सामुदायिक रसोई बड़ी मददगार साबित हो रही हैं। इन रसोइयों में ऐसे लोगों की पेट की आग शांत हो रही है, जिससे उनमें पनप रही निराशा दूर हुई है। जिलाधिकारी की पहल पर ललितपुर तहसील में सामुदायिक रसोई शुरू हुई। इसके बाद कई ग्राम प्रधान, सामाजिक संगठन व स्वयं सेवी संस्थाएं भी सामुदायिक रसोई चलाने को आगे आई हैं।
बुंदेलखंड में सूखा की मार पड़ी है, जिससे अधिकांश खेतों में रबी फसल की बुवाई नहीं हो सकी थी, इसका सीधा असर मजदूरों और गरीबों पर पड़ा है। मजदूरों को रोजगार के लिए जहां भटकना पड़ रहा है, वहीं भोजन के भी लाले पड़ गए हैं। संकट की इस घड़ी में प्रदेश सरकार अंत्योदय परिवारों को समाजवादी सूखा राहत सामग्री मुहैया करा रही है। वहीं, डीएम डा. रूपेश कुमार की पहल पर सामुदायिक रसोई शुरू की गई हैं।
तहसीलदार अवधेश निगम ने ललितपुर तहसील पहुंच रहे कृषकों के लिए सामुदायिक रसोई का संचालन आरंभ किया है। इसमें दोपहर एक बजे से दो बजे के मध्य पका-पकाया भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। ब्लाक जखौरा के ग्राम पनारी, रघुनाथपुरा व बम्हौरी नांगल में ग्राम प्रधानों के सहयोग से असहाय और निर्धन व्यक्तियों को गर्म भोजन खिलाया जा रहा है। इसके अलावा कई सामाजिक संगठन भी आगे आए हैं। श्री तुवन भंडारा सेवा समिति हर मंगलवार को सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक मेन्यू के आधार पर हर वर्ग के निर्धन व्यक्तियों को पूड़ी-सब्जी, कढ़ी-चावल खिलवाती है। इसी तरह दिगंबर जैन पंचायत वर्णी चौराहे पर प्रतिदिन सुबह 10 बजे से 11बजे तक खिचड़ी का वितरण करती है। श्री क्षेत्रपाल मंदिर में वृद्धों को भोजन खिलाया जाता है। जिला अस्पताल में अन्नपूर्णा सेवा संस्थान शाम पांच से छह बजे तक मरीजों व तीमारदारों को भोजन मुहैया करा रही है। इस तरह निर्धन और असहायों को भोजन का इंतजाम हो रहा है।
बीते वर्षों में सरकार ने चलाई थी सामुदायिक रसोई
वर्ष 2007-08 में भी सूखा पड़ा था। उस दौरान सामुदायिक रसोई सरकार की ओर से चलाई गई थी, जिसमें स्कूल की मध्याह्न भोजन योजना में गरीब व असहायों को भोजन खिलाया जाता था। जिसका पैसा सरकार वहन करती थी। इस बार भी सूखे में सामुदायिक रसोई आरंभ होने की उम्मीद थी, लेकिन शासन की ओर से अभी तक कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं। ऐसे में सामाजिक संगठन, ग्राम प्रधान व अधिकारी आगे आए हैं। उन्होंने सामुदायिक भागीदारी से रसोई चलाई हैं, जिसकी सराहना हो रही है।
शासन की मंशा है कि किसी भी व्यक्ति की मौत भूख से नहीं हो। इसे ध्यान में रखकर तहसील में लेखपाल व अन्य कर्मचारियों के सहयोग से कृषकों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है। कुछ ग्राम प्रधानों ने भी इसमें दिलचस्पी दिखाते हुए अपने गांवों में इसकी शुरुआत की है।
- अवधेश निगम
तहसीलदार, ललितपुर