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सबकी जुबान पर यही सवाल, कैसे आया कोरोना

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ललितपुर। लॉकडाउन के 45 दिन बीत जाने के बाद कोरोना संक्रमण का एक भी मरीज नहीं होने से जिले को ग्रीन जोन में रखा गया है। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी की मृत्यु के बाद शनिवार को आई कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट से सभी लोग हैरान हो गए। अब सबकी जुबान पर यही सवाल है कि आखिर कैसे आया ललितपुर में कोरोना। जब सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था चुस्त दुरुस्त थी।
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जिले में कोरोना वायरस संक्रमण से बचाने के लिए लॉकडाउन का पालन कराया जा रहा है। सभी को अनावश्यक रुप से बाहर नहीं निकलने के लिए जागरूक भी किया गया। लॉकडाउन के इतने दिन बीतने के बाद जिला सुरक्षित रहा। कोरोना संक्रमण का एक भी मरीज नहीं होने से जिले को ग्रीन जोन में घोषित किया गया। इससे बाजार को रोस्टर के हिसाब से खोला जाने लगा। ग्रीन जोन में कुछ छूट भी मिल गई थी। लोग कोरोना से बेखौफ हो गए थे।
लेकिन, जैसे ही झांसी में हालात खराब होने के बाद मृत हुए जिला अस्पताल के काउंसलर पद पर तैनात संविदा कर्मी की कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव आई, तो लोग हतप्रभ रह गए। सभी लोगों के मन में एक ही सवाल है कि जिले में कोरोना कैसे आया। यह कर्मचारी कब और कैसे कोरोना संक्रमित हो गया।
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हालांकि, शनिवार को लोग तरह - तरह की चर्चाएं करते रहें। कोरोना संक्रमित मृत व्यक्ति जिला अस्पताल में संविदा कर्मी था। जो काउंसलर के पद पर कार्यरत था। लॉकडाउन के दौरान उसकी ड्यूटी बाहर से आने वालों की थर्मल स्क्रींनिंग के लिए लगी थी। चार बार क्वारंटीन सेंटर में स्क्रीनिंग कर चुका था। लेकिन, स्पष्ट स्थिति अब तक नहीं हो सकी कि कोरोना का संक्रमण आया कहां से हैं। विभाग समेत अन्य लोग भी इसकी जड़ तक नहीं पहुंच सके हैं।
मृत्यु होने के बाद आई पॉजिटिव रिपोर्ट
कोराना संक्रमित व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत थी। इस कारण वह अस्पताल में भर्ती हुआ। जहां से सैंपल जांच के लिए भेजा गया, लेकिन कोरोना की रिपोर्ट जीवित रहते नहीं आ सकी। जबकि, अधिकांश सैंपलों की रिपोर्ट दो दिन में ही आ जाती है, लेकिन यह रिपोर्ट तीन दिन बाद आई। तब तक संक्रमित व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी थी।
मृतक समाजसेवी और मिलनसार था
कोरोना से सुरक्षित रहने वाला जिला अब संक्रमण का शिकार हो गया। इसकी चपेट में आने से जनपद के होनहार और समाजसेवी युवक की मौत ने सभी को झकझोर दिया है। सांप्रदायिक सौहार्द के प्रतीक बाबा सदनशाह की मजार पर उर्स में मृतक फ़्रेंड्स क्लब द्वारा चादर चढ़ाने का कार्य करता रहा है। त्योहार व अन्य खुशियों पर मदर टेरेसा ट्रस्ट द्वारा संचालित दिव्यांग एवं मानसिक विक्षिप्त बच्चों के आश्रम में सहयोग करता था। वहां बच्चों को खाना खिलाता था।
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