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हर माह होती है जच्चा व बच्चा की मौत

Wed, 10 Jun 2015 11:57 PM IST
ललितपुर/ ब्यूरो
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ललितपुर। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए सरकार जहां राष्ट्रीय हेल्थ मिशन के नाम पर अरबों रुपए फूंक रही है, वहीं जिले में हर माह मातृ एवं शिशु मृत्यु के मामले सामने आ रहे हैं। जच्चा व बच्चा की मौत के पीछे खून की कमी प्रमुख वजह बनकर सामने आ रही है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग खून की कमी में गंभीर स्थिति वाली गर्भवती महिलाओं को चिह्नित करने के नाम पर खानापूरी कर रहा है।
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खून की कमी से प्रदेश में हर वर्ष 16 हजार प्रसूताओं की मौत के आंकड़ों से सबक लेते हुए राज्य कार्यक्रम प्रबंधन इकाई ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट कर दिया था। मिशन निदेशक की ओर से स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को भेजे गए पत्र में हाई रिस्क प्रेगनेंसी को चिह्नित करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन, जटिल स्थिति से जूझ रही गर्भवती महिलाओं का हीमोग्लोबिन, रक्तचाप, शुगर व अन्य जांचें कराकर उनको प्रसव के दौरान मौत के खतरों से बचाया जा सके, लेकिन यह तमाम निर्देश स्वास्थ्य विभाग में कागजी औपचारिकताओं तक ही सीमित हैं।


स्वास्थ्य विभाग के एमसीटीएस (मदर एण्ड चाइल्ड ट्रेकिंग सिस्टम) पर लोड किए गए आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल और मई माह में महज 17 हाई रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान की गई है। बार ब्लॉक में तो एक भी हाई रिस्क केस नहीं पाया गया है। इसी तरह, बिरधा ब्लाक में दो, तालबेहट में पांच, जखौरा में पांच, महरौनी में दो और मड़ावरा में तीन केस चिह्नित किए जा सके हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग के मानकों के अनुसार कुल पंजीकृत गर्भवती महिलाओं में तीन प्रतिशत गर्भवती महिलाएं खून की कमी की गंभीर स्थिति की शिकार होती हैं। अप्रैल और मई माह में जिले भर में तीन हजार सात सौ सात गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया गया है। आंकड़ों के लिहाज से हाई रिस्क प्रेगनेंसी की संख्या 75 होनी चाहिए थी। इन हालातों में यह सवाल है कि जटिल स्थिति से जूझ रही शेष 58 गर्भवती महिलाएं किस हाल में जी रही होंगी।
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 चिंताजनक तथ्य यह है कि हाई रिस्क डिलवेरी का यह मानक तो सरकारी है, गरीबी और अशिक्षा से जूूझ रहे इस पिछड़े जनपद में जमीनी सच्चाई अलग है।  पिछले तीन महीनों में हर माह जो मौतें हुईं हैं, उनके पीछे भी खून की कमी प्रमुख वजह बनकर सामने आई है। इसके बाद भी महकमे ने इन घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया है।
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केस नंबर - 01
दिनांक - 24 अप्रैल 2015
घटना - कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत ग्राम भोंरसिल निवासी प्रमिला पत्नी राजपाल की प्रसव के दौरान नवजात शिशु के साथ मौत हो गई।
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केस नंबर - 02
दिनांक - 02 मई 2015
घटना - गोविंद नगर निवासी मजीद की पत्नी शायना की उपचार के दौरान मौत।
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केस नंबर - 03
दिनांक - 07 जून 2015
घटना - जाखलौन के ग्राम रमपुरा निवासी रामसखी के नवजात शिशु की प्रसव के दौरान मौत।
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यह है प्रावधान -
हाई रिस्क प्रेगनेंसी वाली महिलाओं का स्वास्थ्य इकाइयों में प्राथमिकता के साथ इलाज का प्रावधान किया गया है। उनके कार्ड के बायीं ओर एचआरपी लिखने का प्रावधान है, ताकि उसे देखते ही स्वास्थ्य कर्मी गर्भवती महिला को सामान्य मरीजों की तरह कतार में खड़ा नहीं रखकर विशेष महत्व दे सकें। साथ ही, सभी स्वास्थ्य इकाइयों पर यह प्रोटोकॉल भी प्रदर्शित किए जाने का प्रावधान किया गया है कि हाई रिस्क प्रेगनेंसी वाली महिलाओं के उपचार की सुविधा किन स्वास्थ्य इकाइयों में उपलब्ध है, जिससे एएनएम, आशा एवं हेल्थ वर्कर को उनके उचित स्थान पर संदर्भित कर सके। लेकिन, जिले में यह सभी सेवाएं नदारद हैं।
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गर्भवती महिलाओं के चिह्निकरण के मुख्य बिंदु
- मधुमेह, गुर्दा रोग, गंभीर एनीमिया।
- प्लेसेंटा की विकृति या असमान्य स्थिति।
- हाई ब्लड प्रेशर व पेशाब की थैली में सूजन।
- वर्तमान के भ्रूण की असमान्य स्थिति।
- वेजाइनल रक्तस्त्राव
- तंबाकू व अल्कोहल का सेवन
- एक्टोपिक प्रेगनेंसी।
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ध्यान देने योग्य तथ्य -
स्वास्थ्य विभाग के सर्वे के अनुसार 50 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं खून की कमी से ग्रसित रहती हैं। सात ग्राम से कम हीमोग्लोबिन वाली गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी की श्रेणी में आती हैं। 09 से 11 ग्राम हीमोग्लोबिन वाली गर्भवती महिलाएं भी सामान्य से कम की श्रेणी में आती हैं। सामान्य प्रसव के दौरान एक यूनिट से अधिक रक्त बेकार हो जाता है, जबकि आपरेशन से प्रसव के दौरान तीन यूनिट से अधिक खून बेकार बह जाता है। वहीं, सच्चाई यह है कि प्रसव को आने वाली गर्भवती महिलाओं को हीमोग्लोबिन सहित अन्य जांचों की बात तो दूर है, ब्लड ग्रुप की जानकारी भी नहीं रहती है।
 
इनका कहना है,
सभी ब्लाक प्रभारियों को हाई रिस्क प्रेगनेंसी चिह्नत करने के निर्देश दिए गए हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में भी गर्भवती महिलाओं का हीमोग्लोबिन टेस्ट किया जा रहा है। तकनीकी कारणों से एमसीटीएस(मदर एण्ड चाइल्ड ट्रेकिंग सिस्टम) में हाई रिस्क प्रेगनेंसी अपलोड नहीं हो पा रही हैं, जल्द कमियों को दूर किया जाएगा।
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- डा. डीसी दोहरे
नोडल अधिकारी, नेशनल हेल्थ मिशन
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