ललितपुर। कोरोना महामारी के चलते लोगों के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कोरोनाकाल में सौ से अधिक व्यक्ति आत्महत्या कर चुके हैं। इससे राष्ट्र के सामने अर्थव्यवस्था के साथ मानसिक स्वास्थ्य को बचाना भी बड़ी चुनौती बन गया है।
मनोविश्लेषक एवं मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान के संयोजक डा. संजीव कुमार शर्मा ने जनपद में कोरोना काल के दौरान हुई सौ से अधिक आत्महत्याओं के मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कोरोना महामारी को आत्महत्या के लिए पूर्ण रूप से जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन फिर भी एक कारक के रूप में इसे जरूर देखा जा सकता है। एक अध्ययन रिपोर्ट बताती कि कोविड-19 महामारी लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही है। अलगाव, आर्थिक परेशानी आदि के चलते लोगों में चिंता और तनाव का स्तर बढ़ता जा रहा है। ऐसी स्थिति में लोग आत्महत्या जैसे कदम उठाने के लिए बाध्य हो रहे हैं।
ललितपुर में कोरोना काल के दौरान अप्रैल से अब तक सौ से अधिक लोगों ने आत्महत्या की है। हालांकि, कोरोनावायरस महामारी को आत्महत्या के लिए पूर्ण रूप से जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन फिर भी एक कारक के रूप में जरूर देखा जा सकता है। महामारी के कारण रोजगार छिनने का डर, बेरोजगारी, शैक्षिक अवरोध, मूलभूत आवश्यकताओं की आपूर्ति में बाधा, कमजोर अर्थव्यवस्था, लोगों के लिए अब तक अपरिचित रहे। क्वारंटाइन और सोशल डिस्टंसिंग जैसे शब्द भी लोगों में कुंठा एवं अवसाद पैदा कर सकते हैं। खराब मानसिक स्वास्थ्य के साथ यदि अर्थव्यवस्था बचा भी ली जाए तो इससे हमें कुछ ज्यादा हासिल होने वाला नहीं है। इसलिए कोरोना महामारी से आर्थिक, मानसिक एवं सामाजिक स्तरों पर लड़ना होगा।