ललितपुर। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निर्देश पर पनकी ट्रांसमिशन ने बृहस्पतिवार रात्रि से बिजली के रोस्टर में परिवर्तन कर दिया है। अब शाम साढ़े पांच से 8.30 बजे की कटौती नहीं की जाएगी। इसका लाभ नगरवासियों को मिलेगा। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में दो के स्थान पर तीन चरणों में कटौती की जाएगी।
12 लाख की आबादी वाले जिले में 66 केवीए के पांच तथा 33 केवीए के नौ उप बिजलीघर बने हुए हैं। इन उपबिजली घरों में बिजली आने के बाद 11 केवीए के छोटे फीडर के माध्यम से विभिन्न इलाकों को आपूर्ति दी जाती है। बजाज पावर प्लांट शुरू होने से पहले जनपद को पारीछा से बिजली मिलती रही है। पारीछा से हंसारी होते हुए रौंड़ा और इसके बाद पूरे जिले में बिजली पहुंचती थी है। अब बजाज प्लांट की 660 मेगावाट की प्रथम इकाई चालू होने के बाद यह बिजली जिले को दी जा रही है। बजाज प्लांट या उप बिजली घर की लाइन में खराबी आने पर पारीछा की सहायता ली जाती है।
नगर में करीब तीन माह से सुबह आठ से 11 बजे और शाम को 5.30 से 8.30 बजे के बीच बिजली कटौती की जा रही थी। इससे नगरवासियों को खासी परेशानी हो रही थी। क्योंकि, शाम को जब काम करके लोग घर लौटते थे, तो बिजली गुल हो जाती थी। इससे लोगों को बाजार जाने- आने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था। मुहल्लेवासियों के साथ सामाजिक संगठनों ने इसका विरोध किया था व अधिशासी अभियंता प्रशांत सिंह को ज्ञापन दिए थे। इनकी मांग को उच्चाधिकारियों के पास भेजा गया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
लेकिन, एक अक्तूबर बृहस्पतिवार की शाम से दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निर्देश पर पनकी ट्रांसमिशन कानपुर ने नगर के रोस्टर में परिवर्तन कर दिया है। अब सुबह छह से 9 बजे तथा शाम को 3 से 6 बजे के बीच कटौती होती। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि 2 से 5 बजे, सुबह 8 से 11 बजे और शाम 7 से 10 बीच के बीच कटौती की जाएगी।
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नगर में 18 घंटे और गांवों में 15 घंटे बिजली
रोस्टर के अनुसार नगर में 18 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 15 घंटे बिजली पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, फाल्ट अथवा तार टूटने की वजह से इतनी बिजली उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंती है। फाल्ट या अन्य प्रकार की समस्या के कारण होने वाली अघोषित कटौती के समय का समायोजन भी नहीं किया जाता है। इससे नगर के साथ ग्रामीण लोगों को परेशानी बनी रहती है।
पेयजल आपूर्ति में हो सकती परेशानी
नए रोस्टर के अनुसार सुबह छह से नौ बजे के बीच बिजली की कटौती होने से नगर की पेयजलापूर्ति पर असर पड़ सकता है। जब नलों के आने का समय होगा, तब बिजली गुल हो जाएगा। हालांकि, यह समस्या ऊंचाई वाले इलाकों में अधिक होगी। कारण, निचले इलाकों में तो टंकी से पाइप लाइनों के माध्यम से पानी पहुंच जाएगा, लेकिन ऊंचाई वाले क्षेत्र में दिक्कत आएगी।
कैसे मिलेगी भरपूर बिजली
विद्युत अधिकारियों की मानें तो उत्पादन और वितरण अलग-अलग विभाग हैं। प्रदेश में कहीं भी बिजली का उत्पादन होता है तो उसको हाइटेंशन लाइन के माध्यम से ग्रिड में पहुंचा दिया जाता है। इसके बाद वितरण की जिम्मेदारी शक्ति भवन लखनऊ की होती है। शक्ति भवन के निर्देश पर ही दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड किस स्थान को कितने घंटे बिजली दी जाएगी, यह निर्णय लेता है। ऐसे में भले ही जिले में मांग से छह गुना अधिक बिजली बन रही हो, लेकिन जब तक सरकार नहीं चाहेगी, तब तक अतिरिक्त बिजली मिलना मुश्किल है।
चंडी मंदिर के उपभोक्ता हुए परेशान
ललितपुर। फीडर नंबर चार अंतर्गत श्री चंडी माता मंदिर के पास एक ट्रांसफार्मर में खराबी आने के कारण उपभोक्ता परेशान होते रहे। बृहस्पतिवार की पांच बजे लाइनों में फाल्ट होने से ट्रांसफार्मर में खराबी आ गई। जानकारी होने पर अवर अभियंता पंकज मौर्या ने बिजली सुचारु करने की कोशिश की, लेकिन रात्रि आठ बजे तक बिजली सुचारू नहीं हो सकी थी।