ललितपुर। विद्युत वितरण खंड द्वितीय के कार्यालय में कैशियरों द्वारा बिजली के बिलों की राशि में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। कैशियर द्वारा लाखों की राशि विभागीय खाते में जमा नहीं की गई। जिसके चलते अधिशासी अभियंता द्वारा एक कैशियर को निलंबित कर जांच शुरू कर दी है।
विद्युत वितरण खंड द्वितीय के कार्यालय में वसूली जा रही राजस्व की पूरी राशि विभागीय खाते में जमा नहीं करके बिजली विभाग को चूना लगाया जा रहा है। ऐसे ही कुछ मामले खंडीय द्वितीय कार्यालय के अंतर्गत सामने आए हैं, जिनमें कैशियरों ने वसूली गई राजस्व राशि बैंक में विभागीय खाते में जमा नहीं की, जबकि विभाग में दर्शाया गया कि पूरी राशि जमा कर दी है। इनमें एक मामला हाल में पकड़ में आया है जिसके तहत खंडीय कार्यालय में तैनात मुख्य रोकड़िया महेंद्र पाल सिंह ने बीते वर्ष अक्तूबर माह की जांच के दौरान तीन लाख 41 हजार 510 रुपये एवं अन्य श्रेणी के अंतर्गत राजस्व धनराशि 3500 रुपये वसूला लेकिन विभागीय राजस्व खाते में अक्तूबर 2020 के बैंक स्टेटमेंट की जांच करने पर पाया गया कि 26 अक्तूबर 2020 को कुल धनराशि में से मात्र 42 हजार 10 रुपये की विभागीय खाते में जमा किए गए। जबकि शेष राशि विभागीय खाते में जमा नहीं की गई। इसके चलते अधिशासी अभियंता आकाश सचान ने उन्हें निलंबित करते हुए उपखंड द्वितीय कार्यालय में संबद्ध कर दिया है।
वेतन से पचास प्रतिशत राशि काटकर की जा रही वसूली
उधर, अन्य दो मामलों में खंडीय कार्यालय द्वितीय के अंतर्गत ही मड़ावरा में तैनात कर्मचारी मुनीब द्वारा भी दिसंबर माह में दो लाख रुपये जमा कराए गए थे, जिस पर उसके वेतन से पचास प्रतिशत राशि काटकर उक्त राशि की वसूली की जा रही है। इसमें कर्मचारी को निंदा प्रविष्टि, एक इंक्रीमेंट हमेशा के लिए काटने की कार्रवाई की गई है। वहीं एक अन्य मामले में मड़ावरा में ही तैनात कर्मचारी रमाकांत द्वारा भी अप्रैल माह में करीब सोलह लाख रुपये के राजस्व विभागीय खाते में जमा नहीं किया गया था। जिस पर विभाग द्वारा विभागीय प्रक्रिया के तहत अब तक उससे 12 लाख रुपये जमा करा लिया गया है, जबकि बाकी राशि शेष रह गई है।
वर्जन
अभी तक जो भी मामले सामने आए हैं, उनमें विभागीय प्रक्रिया के तहत दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही उनसे धनराशि वसूलने की कार्रवाई की जा रही है। इसमें कर्मचारी महेंद्र पाल सिंह को निलंबित कर दिया गया है, जबकि आगे की कार्रवाई की जा रही है।
आकाश सचान, अधिशासी अभियंता